नयागांव काली मंदिर में ‘बेहरी’ पूजा का शंखनाद! 11 दिनों तक भक्ति में डूबेगा इलाका; 31 मार्च को होगा भव्य भंडारा, मुंडन और बलि की है परंपरा

समाचार के मुख्य बिंदु: आस्था और विश्वास का ऐतिहासिक संगम

  • पूजा का शुभारंभ: नयागांव स्थित सिद्ध काली मंदिर में शनिवार से वार्षिक ‘बेहरी’ पूजा विधिवत रूप से शुरू हो गई है।
  • तिथियों का महत्व: चैत अमावस्या के बाद आने वाले पहले शनिवार से इस पूजा का प्रारंभ होता है, जो लगातार 11 दिनों तक चलता है।
  • महा-समापन: मंगलवार, 31 मार्च को मां काली का भव्य ‘भंडारा’ आयोजित होगा, जो इस उत्सव का मुख्य आकर्षण है।
  • अगाध श्रद्धा: मान्यता है कि मां के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता; मन्नतें पूरी होने पर हजारों श्रद्धालु यहाँ मत्था टेकने पहुँचते हैं।
  • धार्मिक अनुष्ठान: अंतिम दिन सामूहिक मुंडन संस्कार और सैकड़ों बकरों की बलि देने की प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया जाता है।
  • VOB इनसाइट: यह आयोजन केवल एक गांव का नहीं, बल्कि प्रवासी बिहारियों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का एक बड़ा माध्यम है; हजारों लोग केवल इस पूजा के लिए देश के कोने-कोने से अपने गांव पहुँचते हैं।

नयागांव | 27 मार्च, 2026

​बिहार की पावन धरती पर शक्ति उपासना की गौरवशाली परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी है। नयागांव स्थित प्राचीन काली मंदिर में शनिवार से वार्षिक ‘बेहरी’ पूजा का आगाज हो गया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, अगले 11 दिनों तक पूरा क्षेत्र भक्तिमय रहेगा। इस पूजा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें न केवल स्थानीय लोग, बल्कि वे हजारों लोग भी शामिल होते हैं जो रोजगार या अन्य कारणों से सालों से गांव से बाहर रह रहे हैं।

ऋषभ झा की जुबानी: पूजा का विधान और अटूट विश्वास

​गांव के स्थानीय निवासी ऋषभ झा ने इस वार्षिक अनुष्ठान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि चैत अमावस्या के समापन के बाद पड़ने वाले पहले शनिवार से मां की विशेष आराधना शुरू होती है। यह सिलसिला 11 दिनों तक निरंतर चलता है और आगामी 31 मार्च (मंगलवार) को वार्षिक भंडारा पूजा के साथ इसका विधिवत समापन होगा।

​मंदिर में उपस्थित अन्य भक्तों और बुजुर्गों का कहना है कि मां काली के इस दरबार की महिमा अपरंपार है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जो भी सच्चे मन से मां के सामने अपनी झोली फैलाता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। यही कारण है कि मन्नत पूरी होने के बाद भक्त बड़ी संख्या में चढ़ावा और आभार प्रकट करने यहाँ खिंचे चले आते हैं।

31 मार्च को ‘महा-भंडारा’: मुंडन और बलि का विधान

​पूजा के 11वें दिन यानी मंगलवार, 31 मार्च को मंदिर प्रांगण में जनसैलाब उमड़ने की संभावना है। इस दिन को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

  1. भव्य भंडारा: इस दिन मां को विशेष भोग लगाया जाता है और विशाल भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें हजारों लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।
  2. मुंडन संस्कार: क्षेत्र के लोग अपने बच्चों का पहला मुंडन (बाल मुड़वाने की रस्म) इसी पावन दिन मां के चरणों में संपन्न कराते हैं।
  3. बलि की परंपरा: धार्मिक मान्यताओं और मुरादें पूरी होने के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं द्वारा सैकड़ों बकरों की बलि दी जाती है, जो इस मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है।

सुरक्षा के कड़े प्रबंध: पुलिस की पैनी नजर

​वार्षिक पूजा के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमा भी पूरी तरह मुस्तैद है।

  • पुख्ता इंतजाम: पुलिस द्वारा मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सादे लिबास में भी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।
  • भीड़ नियंत्रण: मंदिर ट्रस्ट और स्वयंसेवकों की टीम श्रद्धालुओं की कतारबद्ध एंट्री और निकास सुनिश्चित करने के लिए तैनात की गई है।
  • सीसीटीवी निगरानी: संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की मदद ली जा रही है।

VOB का नजरिया: संस्कृति और जड़ों की ओर वापसी

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि नयागांव की यह बेहरी पूजा केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है।

  • प्रवासियों का मिलन: गांव के बाहर रहने वाले हजारों लोगों का एक साथ आना यह दर्शाता है कि आधुनिकता के दौर में भी ग्रामीण संस्कृति और आस्था की जड़ें बहुत गहरी हैं।
  • आर्थिक गतिविधि: 11 दिनों के इस आयोजन से स्थानीय दुकानदारों, फूल-माला विक्रेताओं और परिवहन क्षेत्र को भी बड़ा आर्थिक सहयोग मिलता है।
  • सांस्कृतिक धरोहर: बलि और मुंडन जैसी परंपराएं इस क्षेत्र की विशिष्ट पहचान को दर्शाती हैं, जिन्हें नई पीढ़ी भी पूरी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही है।

भक्ति, शक्ति और परंपरा का उत्सव

​नयागांव काली मंदिर में शुरू हुई यह बेहरी पूजा आगामी 31 मार्च तक अपने चरम पर होगी। मां काली के जयकारों से पूरा इलाका गूंज रहा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस पावन उत्सव के हर पड़ाव, 31 मार्च के भंडारे की भव्यता और श्रद्धालुओं की आस्था की हर ताज़ा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।

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