HIGHLIGHTS: पारंपरिक खेती से ‘हॉर्टिप्रेन्योरशिप’ की ओर बिहार का बड़ा कदम; स्टार्टअप्स और निवेशकों का महाकुंभ
- ऐतिहासिक आयोजन: 21 से 23 मार्च 2026 तक ज्ञान भवन, पटना में आयोजित हो रहा है बिहार का पहला राष्ट्रीय स्तर का ‘बिहार नर्सरी एवं ग्रीन-टेक कॉनक्लेव’।
- स्मार्ट फार्मिंग: टिश्यू कल्चर, स्मार्ट सिंचाई, और AI/ML आधारित परामर्श के जरिए किसानों को बनाया जाएगा ‘हाई-टेक’।
- बिजनेस हब: “चाणक्य हॉर्टी-पिच” के जरिए स्टार्टअप्स को मिलेगा निवेश; खरीदार और विक्रेताओं (Buyer-Seller) का होगा सीधा मिलन।
- डिजिटल अनुभव: “प्रवाह – पेडलिंग टू प्रोस्पेरिटी” जैसे डिजिटल इंस्टॉलेशन से युवा और महिलाएं जुड़ेंगी आधुनिक बागवानी से।
पटना | 21 मार्च, 2026
बिहार की धरती अब केवल अनाज ही नहीं, बल्कि ‘ग्रीन-गोल्ड’ (High-Value Horticulture) उगलने के लिए तैयार है। कृषि विभाग के प्रधान सचिव श्री नर्मदेश्वर लाल ने शनिवार को ज्ञान भवन में तीन दिवसीय महाकुंभ का उद्घाटन करते हुए बिहार के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने का विजन साझा किया। यह आयोजन बिहार को नर्सरी अर्थव्यवस्था और निर्यात (Export) के वैश्विक मानचित्र पर लाने की एक सोची-समझी रणनीति है।
बागवानी में ‘सिलिकॉन वैली’ जैसी तकनीक: क्या है खास?
कॉनक्लेव में केवल पौधे ही नहीं, बल्कि उन तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है जो अब तक केवल विकसित देशों के बड़े फार्म्स में दिखती थीं:
- ब्लॉकचेन ट्रेसबिलिटी: अब उपभोक्ता जान सकेंगे कि उनका पौधा या फल किस नर्सरी से और किन परिस्थितियों में आया है।
- स्मार्ट सिंचाई और IoT: सेंसर आधारित निगरानी से पानी की बचत और पौधों की सटीक देखभाल संभव होगी।
- उद्यान की पाठशाला: विशेषज्ञों द्वारा नर्सरी प्रबंधन और निर्यात मानकों (Export Standards) पर व्यवहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी।
‘हॉर्टिप्रेन्योरशिप’: बिहार के युवाओं के लिए नया करियर
इस कॉनक्लेव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है युवाओं और महिलाओं को ‘उद्यमी’ बनाना।
- चाणक्य हॉर्टी-पिच: यहाँ नए स्टार्टअप्स अपने आइडिया निवेशकों के सामने रखेंगे, जिससे बिहार में ‘एग्रो-स्टार्टअप’ कल्चर को बढ़ावा मिलेगा।
- मार्केट लिंकिंग: बिहार के नर्सरी संचालकों को सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ा जा रहा है ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके।
VOB का नजरिया: क्या ‘ग्रीन-टेक’ बनेगा ग्रामीण समृद्धि का नया इंजन?
बिहार में नर्सरी और बागवानी को ‘संगठित क्षेत्र’ का दर्जा देना समय की मांग थी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि नर्मदेश्वर लाल की यह पहल कृषि विविधीकरण (Diversification) की दिशा में क्रांतिकारी साबित हो सकती है।
अक्सर बिहार का किसान ‘बाजार’ की कमी के कारण पिछड़ जाता है, लेकिन इस कॉनक्लेव में ट्रेसबिलिटी और डिजिटल परामर्श पर जोर देना यह दर्शाता है कि विभाग अब केवल ‘उत्पादन’ नहीं, बल्कि ‘ब्रांडिंग’ पर ध्यान दे रहा है। “उद्यान की पाठशाला” जैसे कार्यक्रम अगर जिला स्तर तक पहुँचे, तो बिहार जल्द ही देश का सबसे बड़ा ‘नर्सरी हब’ बन सकता है। यह आयोजन पौध-प्रेमियों के लिए एक उत्सव है और उद्यमियों के लिए सुनहरे अवसरों की खान।


