HIGHLIGHTS: पटना-हाजीपुर बॉर्डर पर सघन चेकिंग
- चेक पोस्ट पर एक्शन: जेपी सेतु के ऊपरी चेक पोस्ट पर वाहन जांच के दौरान पुलिस को मिली बड़ी सफलता।
- कार से बरामदगी: ₹10 लाख नकद लेकर पटना से हाजीपुर जा रहा था एक कारोबारी।
- आयकर विभाग अलर्ट: स्रोत की पुख्ता जानकारी न मिलने पर राशि जब्त; अब इनकम टैक्स (IT) विभाग करेगा पैसों का हिसाब।
जब्ती का ‘फाइल’ रिकॉर्ड: एक नजर में
- जब्त कुल राशि: ₹10,00,000 (दस लाख रुपये नकद)।
- बरामदगी का स्थान: जेपी सेतु, ऊपरी चेक पोस्ट, पटना।
- संबंधित थाना: दीघा थाना, पटना।
- कारोबारी का दावा: झाड़ू की आपूर्ति (सप्लाई) के एवज में मिला बकाया ‘कलेक्शन’।
- गंतव्य: पटना से हाजीपुर की ओर।
पटना | 18 मार्च, 2026
पटना और हाजीपुर को जोड़ने वाले जेपी सेतु पर सोमवार की रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पुलिस की रूटीन चेकिंग में एक कार से नोटों की गड्डियां बरामद हुईं। विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिस बल ने जब वाहन की तलाशी ली, तो उसमें ₹10 लाख कैश मिले। कार सवार व्यक्ति ने खुद को एक साधारण झाड़ू कारोबारी बताया, लेकिन पुलिस की ‘सख्त’ पूछताछ के आगे वह कागजी सबूत पेश नहीं कर सका।
“दिसंबर का बकाया है साहब!” — कारोबारी की दलील
विधि-व्यवस्था एसडीपीओ-2 ने बताया कि पकड़े गए व्यक्ति से जब इतनी बड़ी रकम के बारे में पूछा गया, तो उसने अपनी कहानी सुनाई:
- कारोबार का हवाला: उसने दावा किया कि वह झाड़ू का थोक व्यापार करता है।
- पुराना भुगतान: कारोबारी के अनुसार, उसने दिसंबर (2025) में पटना के बाजारों में झाड़ू की सप्लाई दी थी, जिसका पेमेंट (कलेक्शन) उसे अब मिला था।
- पुलिस का एक्शन: चूंकि मौके पर वह इन पैसों का कोई वैध बैंक रिकॉर्ड या आधिकारिक रसीद नहीं दिखा पाया, इसलिए पुलिस ने पूरी राशि जब्त कर दीघा थाना को सौंप दी।
VOB का नजरिया: क्या ‘झाड़ू’ के पीछे कुछ और है?
10 लाख रुपये नकद लेकर यात्रा करना आज के डिजिटल इंडिया में हमेशा संदेह पैदा करता है, खासकर जब कारोबारी झाड़ू जैसे कम मार्जिन वाले व्यापार का हवाला दे रहा हो। दिसंबर का कलेक्शन मार्च में लाना और वह भी बिना किसी ‘इनवॉइस’ के, आयकर विभाग की रडार पर आने के लिए काफी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि पुलिस की यह मुस्तैदी चुनाव या विशेष अभियानों के दौरान तो दिखती है, लेकिन सामान्य दिनों में भी ऐसी चेकिंग अपराध और हवाला के कारोबार को रोकने में कारगर साबित होगी। अब गेंद आयकर विभाग के पाले में है— क्या यह वाकई ‘ईमानदार’ झाड़ू कारोबारी है या काले धन को सफेद करने का कोई नया पैंतरा?


