तीन साल के आंकड़ों से खोली सरकार की पोल
पटना। बिहार विधानसभा में पेश वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर सियासत तेज हो गई है। भागलपुर के पूर्व विधायक अजीत शर्मा ने इसे अब तक का सबसे संक्षिप्त और भ्रामक बजट बताते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने कहा कि यह बजट भाषण न केवल ऐतिहासिक रूप से सबसे छोटा था, बल्कि इसमें राज्य की आर्थिक सच्चाई को छुपाने की कोशिश की गई है। आंकड़े बताते हैं कि बिहार का बजट सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है और राज्य धीरे-धीरे दिवालियेपन की ओर बढ़ रहा है।
अजीत शर्मा ने कहा कि सरकार हर साल जो आय और व्यय का अनुमान लगाती है, वह वास्तविकता से बहुत दूर होता है। बजट बनाते समय जो लक्ष्य तय किए जाते हैं, वे कुछ ही महीनों में पूरी तरह ध्वस्त हो जाते हैं।
2024-25: घाटा तीन गुना बढ़ा
उन्होंने बताया कि 2024-25 में सरकार ने कुल व्यय 2.79 लाख करोड़ रुपये का अनुमान लगाया था, लेकिन संशोधित होकर यह बढ़कर 3.49 लाख 817 करोड़ रुपये हो गया।
सरकार ने राजकोषीय घाटा लगभग 3 प्रतिशत रखने का दावा किया था, लेकिन यह बढ़कर 82,477 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो लगभग 9 प्रतिशत है।
2025-26: चुनावी बजट में बेकाबू घाटा
2025-26 में बजट का आकार 3.17 लाख करोड़ रखा गया था, लेकिन यह बढ़कर 4.23 लाख 284 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
राजकोषीय घाटा 32,718 करोड़ यानी 3 प्रतिशत रखने की बात कही गई थी, लेकिन संशोधित आंकड़ों में यह 1.34 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो करीब 25 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसे उन्होंने “चुनावी बजट का असली चेहरा” बताया।
2026-27: विकास के लिए कुछ नहीं
पूर्व विधायक ने कहा कि 2026-27 में कुल व्यय 3.53 लाख करोड़ रुपये है।
इसमें से 2.84 लाख करोड़ रुपये केवल राजस्व व्यय में जा रहे हैं, यानी वेतन, पेंशन और सब्सिडी में।
पूंजीगत व्यय सिर्फ 63,455 करोड़ रुपये है, जो कुल बजट का मात्र 18 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि यही आंकड़ा साबित करता है कि यह विकास का नहीं, घाटे का बजट है।
“घाटे का झूठा नियंत्रण”
सरकार भले ही 2.99 प्रतिशत GSDP के घाटे का दावा कर रही हो, लेकिन पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखते हुए यह 15 से 20 प्रतिशत तक जा सकता है।
उन्होंने चेताया कि पिछले साल 1.34 लाख करोड़ रुपये का घाटा दर्ज हुआ था।
अपनी कमाई सिर्फ 20 प्रतिशत
अजीत शर्मा ने कहा कि बिहार की आर्थिक स्थिति केंद्र पर अत्यधिक निर्भर है।
राज्य की अपनी कमाई सिर्फ 20 प्रतिशत के आसपास है, जबकि 80 प्रतिशत से अधिक राशि केंद्र से आती है।
2026-27 में केंद्र से मिलने वाला अनुदान भी घटाया गया है, जो 54,757 करोड़ से घटकर 51,895 करोड़ हो गया है, जबकि दोनों जगह एनडीए की सरकार है।
“यह बजट भ्रम फैलाने वाला है”
अंत में उन्होंने कहा कि यह बजट जनता को गुमराह करने वाला है।
अगर पिछले तीन वर्षों के बजट का मिलान किया जाए तो साफ दिखता है कि सरकार को न अपनी आय का सही अनुमान है और न अपने खर्च पर नियंत्रण।
यह बजट बिहार के विकास का नहीं, बल्कि बढ़ते घाटे और आर्थिक संकट का दस्तावेज है।


