मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: तीन दौर की बातचीत फेल होने के बाद अमेरिका-इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला

मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई, बल्कि इसके पीछे कई दौर की असफल कूटनीतिक वार्ताएं थीं।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तीन दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इन वार्ताओं के विफल होने के बाद वाशिंगटन इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि तेहरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को सीमित करने को लेकर गंभीर नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राजनयिकों ने कई हफ्तों तक ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत की। इस दौरान बैठकें ओमान और स्विट्जरलैंड में भी हुईं। अमेरिका ने समझौते के लिए विभिन्न प्रस्ताव रखे, कुछ शर्तों में नरमी दिखाई और कई बार वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश की।

हालांकि, अंतिम दौर की बैठक के कुछ ही दिनों बाद अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि लगातार असफल प्रयासों के बाद उन्हें लगा कि कूटनीतिक रास्ता अब प्रभावी नहीं रहा। इसके बाद पूरी रिपोर्ट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सौंपी गई, जिसके बाद सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया गया।

इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस घटनाक्रम पर टिकी हैं।

  • Related Posts

    तोरखम बॉर्डर पर पाकिस्तानी सेना की सर्जिकल स्ट्राइक, अफगान तालिबान का शीर्ष कमांडर ढेर

    Share Add as a preferred…

    Continue reading