मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव: बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर मिसाइल हमला, दुबई में भी गिरी प्रोजेक्टाइल का मलबा

दुबई/बगदाद। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। ताजा घटनाओं में इराक की राजधानी बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर पर मिसाइल हमला किए जाने की खबर सामने आई है। वहीं दूसरी ओर दुबई के वित्तीय क्षेत्र में एक इमारत पर इंटरसेप्ट किए गए प्रोजेक्टाइल का मलबा गिरने की घटना भी सामने आई है। इन घटनाओं ने क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

जानकारी के अनुसार दुबई के फाइनेंशियल हब में स्थित एक इमारत पर रोके गए प्रोजेक्टाइल का मलबा गिरा। अधिकारियों ने बताया कि यह मलबा उस मिसाइल या प्रोजेक्टाइल का हिस्सा था जिसे एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही रोक दिया था। दुबई मीडिया ऑफिस ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और इस घटना में किसी के घायल होने या आग लगने की खबर नहीं है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 24 घंटे के भीतर दुबई में इस तरह की यह दूसरी घटना है, जिसने क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

उधर इराक की राजधानी बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर भी हमले का निशाना बना। इराकी सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार एक मिसाइल दूतावास परिसर के अंदर स्थित हेलीपैड के पास गिरी। घटना के बाद परिसर से धुआं उठते देखा गया। हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अमेरिकी दूतावास की ओर से इस हमले को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि इससे पहले दूतावास ने इराक के लिए ‘लेवल 4’ सुरक्षा अलर्ट जारी किया था, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को यात्रा से बचने की सलाह दी गई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाएं मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का संकेत हैं। पहले यह टकराव मुख्य रूप से तेहरान और तेल अवीव के बीच सीमित माना जा रहा था, लेकिन अब इसके असर इराक और खाड़ी देशों तक भी दिखाई देने लगे हैं।

गौरतलब है कि बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास दुनिया की सबसे बड़ी अमेरिकी राजनयिक सुविधाओं में से एक है। अतीत में भी यह परिसर कई बार रॉकेट और ड्रोन हमलों का निशाना बन चुका है, जिनके पीछे ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों पर संदेह जताया जाता रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर इस क्षेत्र में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।

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