पटना, 10 अगस्त 2025 – बिहार की सियासत में रविवार को बम फोड़ते हुए राजद नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा पर ऐसा आरोप लगाया जिसने पूरे राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। तेजस्वी ने दावा किया कि सिन्हा के पास दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता पहचान पत्र हैं—एक लखीसराय से और दूसरा पटना के बांकीपुर से।
तेजस्वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ताल ठोकते हुए कहा—
“विजय कुमार सिन्हा एक नहीं, बल्कि दो-दो जगह के वोटर हैं! एक ईपीआईसी नंबर IAF3939337 लखीसराय का है और दूसरा AFS0853341 बांकीपुर का। इतना ही नहीं, एक लिस्ट में उनकी उम्र 57 साल है, तो दूसरी में 60 साल। ये क्या है? अगर ये धोखाधड़ी नहीं, तो फिर क्या है?”
तेजस्वी ने सवालों की झड़ी लगाते हुए कहा—
“क्या चुनाव आयोग बताएगा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद भी ऐसा कैसे हुआ? क्या उपमुख्यमंत्री ने दो अलग-अलग जगह फॉर्म भरकर जानबूझकर दो वोट बनवाए? अगर उन्होंने फॉर्म पर खुद साइन नहीं किए, तो फिर आयोग ने जाली हस्ताक्षरों पर वोट कैसे बना दिए? क्या अब उन्हें भी नोटिस मिलेगा, या ये नियम सिर्फ विपक्ष पर लागू होते हैं?”
“उम्र घोटाला” का तड़का
तेजस्वी ने “उम्र में हेरफेर” के आरोप को भी जोरदार तरीके से पेश किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—
“एक ही इंसान की दो उम्र! कहीं 57, कहीं 60… ये नया जादू है क्या? ये तो चुनावी ‘दो नंबर का खेल’ है।”
EC पर भी बरसे तेजस्वी
राजद नेता ने खुद पर लगे दो ईपीआईसी रखने के पुराने आरोप का हवाला देते हुए चुनाव आयोग पर भी हमला बोला।
“मुझ पर तो आयोग ने नोटिस ठोंक दिया… लेकिन यहां गलती खुद आयोग की है और ठीकरा विपक्ष पर फोड़ रहे हैं। अगर मुझे दो ईपीआईसी दिए गए, तो ये किसकी गलती है? गलती खुद करें, जवाब मुझसे मांगें—ये कौन सा न्याय है?”
तेजस्वी ने चुनौती दी—
“बिहार में या तो चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया ही फर्जी है, या फिर बिहार के उपमुख्यमंत्री खुद फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। दोनों में से कोई एक सच है। अगर हिम्मत है तो विजय सिन्हा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें।”
सियासी गर्मी चरम पर
तेजस्वी के इस ‘डबल वोटर कार्ड’ हमले के बाद बिहार की राजनीति में तुफान आ गया है। भाजपा खेमे ने इसे “राजनीतिक स्टंट” बताया है, जबकि राजद समर्थक इसे “भ्रष्टाचार का खुला सबूत” मान रहे हैं।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्वाचन आयोग इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है—क्या ये मामला महज तकनीकी त्रुटि है, या फिर सच में बिहार की राजनीति का नया ‘चुनावी घोटाला’?


