तेज प्रताप यादव को RJD से निष्कासन पर तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया: “हमें अच्छा नहीं लगता, लेकिन राजनीतिक और निजी जीवन अलग होता है”

पटना, 25 मई 2025 — बिहार की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। इसके बाद रविवार को तेज प्रताप के छोटे भाई और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी।

तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमें ये सब अच्छा नहीं लगता है, न हम इसे बर्दाश्त करते हैं। मेरे बड़े भाई की बात है, तो राजनीतिक और निजी जीवन अलग होता है। निजी जीवन के निर्णय लेने का उनका अधिकार है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी और परिवार का सम्मान सर्वोपरि है, और वे बिहार की जनता के मुद्दों पर काम कर रहे हैं।

तेज प्रताप पर लालू यादव का सख्त रुख

शनिवार को लालू यादव ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर तेज प्रताप यादव को पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा की थी। उन्होंने लिखा, “निजी जीवन में नैतिक मूल्यों की अवहेलना करना हमारे सामाजिक न्याय के लिए सामूहिक संघर्ष को कमजोर करता है… अब से पार्टी और परिवार में उसकी किसी भी प्रकार की कोई भूमिका नहीं रहेगी।”

उन्होंने आगे कहा कि “अपने निजी जीवन का भला-बुरा और गुण-दोष देखने में वह स्वयं सक्षम है। उससे जो भी लोग संबंध रखेंगे, वे स्वविवेक से निर्णय लें।”

रोहिणी आचार्य का भी तीखा संदेश

लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी तेज प्रताप पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए एक्स पर लिखा:
“जो अपनी मर्यादा, परिवार और परवरिश का ख्याल रखते हैं, उन पर कभी सवाल नहीं उठते। लेकिन जो खुद बारंबार गलतियाँ करते हैं, वे ही आलोचना का पात्र बनते हैं। हमारे लिए पापा देवतुल्य हैं और पार्टी हमारी पूजा।”

तेज प्रताप की सफाई

इस पूरे विवाद से पहले शनिवार को एक कथित पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें तेज प्रताप यादव एक युवती के साथ देखे गए थे। इस पोस्ट के वायरल होने के बाद तेज प्रताप यादव ने सफाई दी और कहा, “मेरे सोशल मीडिया अकाउंट को हैक कर तस्वीरें एडिट की गई हैं… मुझे और मेरे परिवार को बदनाम किया जा रहा है।”

पार्टी और परिवार में दरार या नई राजनीति की शुरुआत?

विश्लेषकों का मानना है कि तेज प्रताप यादव के निष्कासन से न केवल राजद के भीतर तनाव बढ़ा है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर पड़ सकता है। वहीं तेजस्वी यादव का संतुलित बयान इस बात का संकेत देता है कि वे अपने राजनीतिक फोकस को जनता और विकास के मुद्दों तक सीमित रखना चाहते हैं।

राजद सुप्रीमो लालू यादव के इस निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी अनुशासन और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा उनके लिए सर्वोपरि है, चाहे वह किसी भी सदस्य पर लागू क्यों न हो। अब देखना यह होगा कि तेज प्रताप यादव आगे क्या रुख अपनाते हैं, और क्या यह निर्णय राजद की आंतरिक राजनीति में कोई नया मोड़ लाएगा।


 

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