केरल में तेजस्वी यादव की RJD ने बनाई पहचान, कूथुपरम्बा में जीत, दो सीटों पर मजबूत प्रदर्शन

पटना/केरल: बिहार की राजनीति से निकलकर दक्षिण भारत में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने केरल विधानसभा चुनाव 2026 में अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए सभी को चौंका दिया है। के नेतृत्व में पार्टी ने न सिर्फ कन्नूर जिले की कूथुपरम्बा सीट पर जीत दर्ज की, बल्कि दो अन्य सीटों—कलपेटा और वाडकारा—पर भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए खुद को एक उभरती ताकत के रूप में स्थापित किया।

कूथुपरम्बा में RJD की ऐतिहासिक जीत

केरल की कूथुपरम्बा सीट पर RJD के उम्मीदवार पी.के. प्रवीन ने शानदार जीत हासिल की। उन्होंने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के उम्मीदवार जयंती राजन को 1286 वोटों के अंतर से हराया।

मतगणना के शुरुआती राउंड से ही प्रवीन ने बढ़त बना ली थी और अंत तक उसे कायम रखा। उन्हें कुल 70,448 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 69,162 वोट प्राप्त हुए।

यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि यह पहली बार है जब RJD ने केरल जैसे राज्य में चुनाव जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

कलपेटा में दूसरा स्थान, लेकिन मजबूत संदेश

कलपेटा सीट पर RJD के उम्मीदवार पी.के. अनिल कुमार ने भले ही जीत हासिल नहीं की, लेकिन उनका प्रदर्शन पार्टी के लिए उत्साहजनक रहा।

यहां कांग्रेस के टी. सिद्दीकी ने जीत दर्ज की, लेकिन RJD उम्मीदवार ने 52,348 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर जगह बनाई। हालांकि हार का अंतर 45 हजार से अधिक रहा, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रदर्शन एक नए दल के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है।

वाडकारा में भी RJD ने दिखाई ताकत

वाडकारा सीट पर भी RJD ने कड़ा मुकाबला किया। पार्टी के उम्मीदवार एम.के. भास्करन को 55,255 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे।

यहां आरएमपीआई की के.के. रेमे ने 70,117 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की। हार के बावजूद RJD का यह प्रदर्शन यह दर्शाता है कि पार्टी धीरे-धीरे केरल की राजनीति में अपनी जगह बना रही है।

दक्षिण भारत में RJD की एंट्री

अब तक RJD को मुख्य रूप से बिहार और उत्तर भारत की पार्टी माना जाता रहा है, लेकिन केरल में इस प्रदर्शन ने पार्टी के विस्तार की नई संभावनाओं को जन्म दिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ने रणनीतिक रूप से केरल जैसे राज्य को चुना, जहां सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों में नई संभावनाएं मौजूद हैं।

यह कदम केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

तेजस्वी यादव की रणनीति हुई सफल

तेजस्वी यादव ने केरल में सीमित सीटों पर उम्मीदवार उतारकर “फोकस्ड स्ट्राइक” की रणनीति अपनाई।

उन्होंने तीन सीटों—कूथुपरम्बा, कलपेटा और वाडकारा—पर उम्मीदवार खड़े किए और हर सीट पर पार्टी ने प्रभावी प्रदर्शन किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति भविष्य में अन्य राज्यों में भी अपनाई जा सकती है, जहां पार्टी धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।

राष्ट्रीय राजनीति में संदेश

केरल चुनाव में RJD के इस प्रदर्शन को राष्ट्रीय राजनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह संकेत देता है कि क्षेत्रीय दल अब अपने पारंपरिक क्षेत्रों से बाहर निकलकर नए राज्यों में भी संभावनाएं तलाश रहे हैं।

तेजस्वी यादव की यह पहल उन्हें एक राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

विपक्षी दलों के लिए चुनौती

RJD की इस एंट्री से केरल की पारंपरिक राजनीति—जहां मुख्य मुकाबला LDF और UDF के बीच होता रहा है—में एक नया आयाम जुड़ गया है।

हालांकि अभी पार्टी का आधार सीमित है, लेकिन भविष्य में यह समीकरण बदल सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर RJD इसी तरह काम करती रही, तो आने वाले चुनावों में वह और मजबूत स्थिति में आ सकती है।

कार्यकर्ताओं में उत्साह

केरल और बिहार दोनों जगहों पर RJD कार्यकर्ताओं में इस प्रदर्शन को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

पार्टी कार्यालयों में जश्न का माहौल है और इसे एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में पार्टी और बेहतर प्रदर्शन करेगी।

केरल विधानसभा चुनाव 2026 में RJD का प्रदर्शन भले ही सीमित सीटों तक रहा हो, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व कहीं अधिक है।

कूथुपरम्बा में जीत और अन्य सीटों पर मजबूत प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि की रणनीति असरदार रही है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि RJD इस सफलता को आगे कैसे भुनाती है और क्या वह भविष्य में दक्षिण भारत की राजनीति में अपनी स्थायी जगह बना पाती है या नहीं।

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