
पटना में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय जनता दल के नेता ने बिहार की मौजूदा सियासत को लेकर तीखा बयान दिया। उन्होंने भावी मुख्यमंत्री की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए जेडीयू नेताओं की चुप्पी पर भी निशाना साधा।
अंबेडकर जयंती कार्यक्रम में उठाया मुद्दा
बाबा साहेब की 135वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में तेजस्वी यादव ने कहा कि जो लोग उनकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते रहे हैं, वे अब सम्राट चौधरी के सर्टिफिकेट पर चुप क्यों हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस को समर्थन देने की राजनीतिक रणनीति के कारण ही को इस्तीफा देना पड़ा।
भाजपा-आरएसएस पर हमला
तेजस्वी यादव ने कहा कि उनकी पार्टी ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ लगातार संघर्ष किया, लेकिन अंततः सत्ता उन्हीं विचारधाराओं को सौंप दी गई। उन्होंने इसे बाबा साहेब के विचारों के खिलाफ बताया।
परिवारवाद और राजनीति पर बयान
परिवारवाद के मुद्दे पर पलटवार करते हुए तेजस्वी ने कहा कि कई दलों में बिना संघर्ष के लोग सत्ता तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में उनकी योग्यता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
आर्थिक हालात पर भी चिंता
तेजस्वी यादव ने बिहार की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य का खजाना खाली हो चुका है और कर्मचारियों को समय पर वेतन-पेंशन नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने बिजली व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उपभोक्ताओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
नई सरकार की स्थिरता पर सवाल
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बनने वाली नई सरकार स्थिर नहीं होगी, जिससे विकास कार्य प्रभावित होंगे।
सामाजिक एकता की अपील
उन्होंने पिछड़ा, अति-पिछड़ा, अनुसूचित जाति-जनजाति और अल्पसंख्यक समाज से एकजुट रहने की अपील की और कहा कि सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
आरक्षण में आरक्षण की मांग
तेजस्वी ने महिलाओं के लिए आरक्षण में आरक्षण की मांग दोहराते हुए कहा कि इस मुद्दे को संसद में भी उठाया जाएगा।
मेधावी छात्रों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मेधावी छात्रों को भी सम्मानित किया गया। इंटर और मैट्रिक में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को नगद पुरस्कार और शॉल देकर सम्मानित किया गया।
कुल मिलाकर, तेजस्वी यादव का यह बयान बिहार की सियासत में एक नई बहस को जन्म दे रहा है, जिसमें अब सम्राट चौधरी की शैक्षणिक योग्यता और नई सरकार की स्थिरता जैसे मुद्दे केंद्र में आ गए हैं।


