जिसका किया था विरोध, अब उसी से भविष्य पूछ रहे तेज प्रताप! सियासत में बदले सुर पर उठे सवाल

बिहार की राजनीति में एक बार फिर दिलचस्प मोड़ देखने को मिला है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वे बागेश्वर धाम के प्रमुख संत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बातचीत करते नजर आ रहे हैं।

यह वीडियो सामने आते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि तेज प्रताप यादव वही नेता हैं जिन्होंने कुछ समय पहले धीरेंद्र शास्त्री के बिहार दौरे का खुलकर विरोध किया था। अब उसी संत से राजनीतिक भविष्य पूछना उनके बदले रुख का संकेत माना जा रहा है।

वीडियो में तेज प्रताप यादव मुस्कुराते हुए संत धीरेंद्र शास्त्री से कहते हैं, “बाबा, मेरा थोड़ा राजनीतिक भविष्य देख लीजिए।” इस पर धीरेंद्र शास्त्री जवाब देते हैं, “जब साथ बैठेंगे, तब विस्तार से बताएंगे।” इस पर तेज प्रताप भी सहमति जताते हुए कहते हैं, “जी-जी, साथ बैठेंगे।” दोनों के बीच हुई यह हल्की-फुल्की बातचीत अब एक बड़े राजनीतिक विमर्श का कारण बन गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस वीडियो का महत्व केवल एक साधारण बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में बदलते समीकरणों और नेताओं के बदलते रुख को भी दर्शाता है। तेज प्रताप यादव के इस कदम को कई लोग उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे व्यक्तिगत आस्था से जोड़कर देख रहे हैं।

गौरतलब है कि वर्ष 2023 में जब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बिहार दौरा प्रस्तावित था, तब तेज प्रताप यादव ने इसका कड़ा विरोध किया था। उन्होंने उस समय बिहार को महात्मा गांधी और भगवान बुद्ध की धरती बताते हुए ऐसे आयोजनों पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए गए तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे।

इतना ही नहीं, तेज प्रताप यादव ने पहले कई मौकों पर धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से तीखे बयान भी दिए थे। उन्होंने धार्मिक आयोजनों को लेकर सवाल उठाए थे और इसे सामाजिक सौहार्द के लिए चुनौती बताया था। ऐसे में अब उसी व्यक्ति से संवाद और अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल करना कई लोगों को हैरान कर रहा है।

हाल के दिनों में तेज प्रताप यादव का झुकाव धार्मिक गतिविधियों की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘संत तेज प्रताप’ नाम से एक नया मंच भी शुरू किया है, जहां वे धार्मिक विषयों पर अपने विचार साझा करते हैं। वे कई बार आध्यात्मिक प्रवचन शैली में भी नजर आते हैं, जिससे उनकी छवि में एक नया आयाम जुड़ता दिखाई दे रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय राजनीति में धर्म और आध्यात्म का प्रभाव हमेशा से रहा है। ऐसे में नेताओं द्वारा धार्मिक गुरुओं से संपर्क साधना कोई नई बात नहीं है। हालांकि, जब कोई नेता पहले विरोध करता है और बाद में उसी व्यक्ति के साथ सहज बातचीत करता है, तो यह स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाता है।

तेज प्रताप यादव के इस कदम को विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक अवसरवाद बता रहे हैं, तो कुछ इसे व्यक्तिगत परिवर्तन और आस्था का हिस्सा मान रहे हैं। वहीं, राजद के भीतर भी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक नया विमर्श खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। समर्थक इसे सहज और मानवीय व्यवहार बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक अस्थिरता का उदाहरण मान रहे हैं।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि तेज प्रताप यादव हमेशा से अपने अलग अंदाज और बयानों के लिए जाने जाते रहे हैं। वे पारंपरिक राजनीतिक ढांचे से हटकर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करते रहे हैं। ऐसे में यह घटना भी उनके उसी अनोखे राजनीतिक व्यक्तित्व का हिस्सा मानी जा रही है।

अंततः, यह घटना केवल एक वायरल वीडियो भर नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि राजनीति में विचार और रुख समय के साथ बदल सकते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि तेज प्रताप यादव का यह बदला हुआ अंदाज उनके राजनीतिक सफर को किस दिशा में ले जाता है और जनता इसे किस रूप में स्वीकार करती है।

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