मालदा, 16 मार्च 2026: पूर्व रेलवे के द्वारा बड़हरवा रेलवे स्टेशन स्थित रेल पथ कार्यालय में हिंदी में एक तकनीकी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का विषय “गरमी के मौसम में पटरियों का रखरखाव” रखा गया, जिसमें रेलवे के इंजीनियरों और कर्मचारियों ने भाग लेकर तकनीकी विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
यह कार्यक्रम मंडल रेल प्रबंधक के मार्गदर्शन तथा मालदा मंडल के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में आयोजित किया गया। संगोष्ठी में बड़हरवा स्टेशन के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ अनुवादक विद्यासागर राम ने स्वागत भाषण के साथ की। उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सीनियर सेक्शन इंजीनियर एस. एल. मरैया तथा मुख्य वक्ताओं — सीनियर सेक्शन इंजीनियर (रेल पथ) शशिकांत कुमार और जूनियर इंजीनियर सैयदुल हक — का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में एस. एल. मरैया ने कहा कि तकनीकी विषयों पर हिंदी में संगोष्ठी आयोजित करने से कर्मचारियों को जटिल तकनीकी जानकारियां सरल और सहज भाषा में समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि रेलवे के संचालन और रखरखाव से जुड़े विषयों को मातृभाषा या राजभाषा में समझना कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक होता है।
संगोष्ठी के दौरान मुख्य वक्ताओं ने गर्मी के मौसम में रेल पटरियों के रखरखाव की चुनौतियों और आवश्यक सावधानियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तापमान बढ़ने के कारण रेल पटरियों में फैलाव (एक्सपेंशन) की समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिससे ट्रैक की सुरक्षा और संचालन पर असर पड़ता है। इसलिए नियमित निरीक्षण, ट्रैक की निगरानी और समय पर मरम्मत बेहद आवश्यक होती है।
विशेषज्ञों ने कर्मचारियों को यह भी बताया कि गर्मी के दौरान पटरियों की स्थिति पर विशेष ध्यान देना चाहिए और किसी भी तरह की तकनीकी गड़बड़ी को तुरंत ठीक किया जाना चाहिए, ताकि ट्रेनों का संचालन सुरक्षित और सुचारू रूप से जारी रह सके।
इस अवसर पर कर्मचारियों ने तकनीकी विषयों से जुड़े कई सवाल भी पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाब दिया। संगोष्ठी के माध्यम से कर्मचारियों को न केवल तकनीकी जानकारी मिली बल्कि राजभाषा हिंदी के उपयोग को भी बढ़ावा मिला।
मालदा मंडल के अधिकारियों ने बताया कि रेलवे में हिंदी के प्रचार-प्रसार और इसके अधिकाधिक उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस तरह की तकनीकी संगोष्ठियां कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ कार्यालयी कार्यों में हिंदी के प्रभावी प्रयोग को भी मजबूत बनाती हैं।


