
पटना, 18 जुलाई 2025: राजधानी पटना के बहुचर्चित पारस अस्पताल हत्याकांड में जिस शख्स की तलाश पुलिस कर रही है, वह कोई अंजान या गुमनाम अपराधी नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर “रॉब” दिखाने वाला तौसीफ बादशाह है। 26 वर्षीय तौसीफ ने जिस बेखौफ अंदाज़ में अस्पताल में दाखिल होकर एक गैंगस्टर की हत्या की, वो उसकी इंस्टाग्राम रील्स में दिखाई गई खुद की छवि से चौंकाने वाली समानता रखता है।
रील और रियल लाइफ का फासला मिटा बैठा तौसीफ
हत्या के एक दिन बाद पुलिस को तौसीफ बादशाह का इंस्टाग्राम अकाउंट मिला। उस पर दर्जनों ऐसी रील्स हैं जो अब पुलिस और साइबर सेल की जांच का हिस्सा बन चुकी हैं। एक रील में वह लिखता है:
“लोग बातें बनाते रह जाएंगे, और हम कहानी बनाकर छोड़ जाएंगे…”
एक अन्य रील में वह खुद को “शिकारी” बताते हुए कहता है:
“जिस जंगल में तुम शेर बने घूमते हो, उस जंगल के बेखौफ शिकारी हैं हम…”
तौसीफ की तीसरी रील, जो अब चर्चा में है, उसमें वह कहता है:
“रॉब आंखों में होनी चाहिए लाला, वरना हथियार तो चौकीदार भी रखता है…”
ये संवाद महज रील्स नहीं रहे, बल्कि पारस अस्पताल के वार्ड नंबर 209 में हुई हत्या की शैली में पूरी तरह से साकार हो उठे।
कौन है तौसीफ बादशाह?
पुलिस के अनुसार, तौसीफ पटना के फुलवारी शरीफ का रहने वाला है। उसके पिता का हार्डवेयर का कारोबार है, जबकि माँ एक निजी विद्यालय में शिक्षिका हैं। उसने सेंट कैरेंस स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की है। पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम पहले से आर्म्स एक्ट के एक मामले में दर्ज है।
सूत्रों के मुताबिक, तौसीफ हाल ही में सुपारी किलिंग के धंधे में सक्रिय हुआ था। हत्या करना हो या अपराधियों के लिए रसद पहुंचाना — वह पैसे के लिए सब करने को तैयार था।
सोशल मीडिया: अपराध की छाया में बना ‘स्टार’
तौसीफ सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय था। फॉलोअर्स बढ़ाने और ‘गैंगस्टर’ छवि दिखाने की होड़ में उसने खुद को अपराधी के रूप में गढ़ा। वह अपनी रील्स में हथियार, ताकत और ‘बेखौफ’ जीवनशैली का खुलेआम प्रदर्शन करता था। पारस अस्पताल में खुलेआम गोलीबारी और फिर बिना किसी डर के निकल जाना, उसकी उसी रील लाइफ की प्रत्यक्ष झलक है।
जांच एजेंसियों के लिए नया सिरदर्द
पारस हत्याकांड के बाद अब तौसीफ का डिजिटल जीवन भी जांच के दायरे में आ चुका है। पुलिस यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या तौसीफ के सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए उसे आपराधिक संपर्क और सुपारी मिली थी। इसके साथ ही यह पहलू भी देखा जा रहा है कि कैसे सोशल मीडिया पर दिखाया गया ‘गैंगस्टर ग्लैमर’ युवाओं को अपराध की तरफ आकर्षित कर रहा है।
तौसीफ बादशाह अब सिर्फ एक हत्याकांड का आरोपी नहीं, बल्कि एक ऐसी सोच का प्रतीक बन गया है जहां सोशल मीडिया की虚छवि (आभासी छवि) रियल वर्ल्ड में जानलेवा रूप ले लेती है। पारस अस्पताल हत्याकांड न केवल पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि समाज और युवाओं के सोचने के तरीके पर भी गंभीर मंथन की मांग करता है।


