
भागलपुर, 19 सितंबर 2025: भागलपुर के चंपानगर क्षेत्र में स्थित मंचमुंड आसन आज भी तांत्रिक साधना का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। बताया जाता है कि तारापीठ के सिद्ध तांत्रिक बामा खेपा स्वयं 1897 में यहां आए थे और देवी की वेदी का पूजन कर इस स्थान को सिद्ध पीठ का दर्जा दिया था।
बामा खेपा का चंपानगर आगमन
वार्ड नंबर एक के पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी देवाशीष बनर्जी के अनुसार, महाशय ड्योढ़ी के तारकनाथ घोष के आमंत्रण पर बामा खेपा यहां पधारे थे। उन्होंने अपने तांत्रिक अनुष्ठानों के माध्यम से इस क्षेत्र को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिसिंचित किया था।
तंत्र साधना का प्राचीन केंद्र
- चंपानगर स्थित चंपा नदी का किनारा प्राचीन काल से ही तंत्र साधना का क्षेत्र माना जाता रहा है।
- दुर्गाष्टमी और कालीपूजा जैसी तिथियों पर दूर-दराज़ से साधक यहां जुटते थे।
- बामा खेपा ने भी यहां आयोजित तांत्रिकों की संसद में भाग लिया था।
आज भी जारी अनुष्ठान
स्थानीय लोगों और महाशय परिवार के सहयोग से यहां नवरात्र और कालीपूजा पर विशेष अनुष्ठान अब भी आयोजित किए जाते हैं।
चंपानगर क्षेत्र में वर्तमान में पंचमुंड आसन मंदिर समेत 17 मां काली के मंदिर स्थित हैं, जो इसकी समृद्ध तांत्रिक परंपरा की गवाही देते हैं।
चंपानगर आज भी आध्यात्मिक और तांत्रिक साधना का प्रमुख स्थल है, जहां बामा खेपा की साधना की स्मृति लोक आस्था को जीवित रखे हुए है।


