मालदा। 22 सितम्बर 2025।पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने “स्वच्छता ही सेवा – 2025” अभियान के तहत अनूठी और प्रेरणादायक पहल की है। 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में रीड्यूस, रीयूज़ और रीसायकल (RRR), कचरे से कला और शून्य कचरा जीवनशैली जैसे विषयों पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
भागलपुर: वेस्ट टू आर्ट प्रदर्शनी
भागलपुर कोचिंग डिपो में आयोजित “वेस्ट टू आर्ट” प्रदर्शनी लोगों के लिए खास आकर्षण रही। यहाँ रेलकर्मियों ने अनुपयोगी सामग्री को सजावटी वस्तुओं में बदला। अपशिष्ट सामग्री से तैयार हाथी की आकृति प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण रही, जिसने नवाचार और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया।
जमालपुर: कबाड़ से तितली और सूरजमुखी
जमालपुर डीज़ल शेड में रेलकर्मियों ने अपशिष्ट पदार्थों से सूरजमुखी और तितली का सृजन किया। यह रचना साफ संदेश देती है कि फेंकी गई वस्तुएँ भी समाजहित में उपयोग की जा सकती हैं, बशर्ते उन्हें सही दिशा में काम में लिया जाए।
स्कूल में नुक्कड़ नाटक से संदेश
पूर्व रेलवे हाई स्कूल, साहिबगंज में छात्रों को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। इसमें बच्चों ने स्वच्छता और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपनाने की अपील की।
स्टेशन पर जागरूकता अभियान
भागलपुर स्टेशन पर यात्रियों और कर्मचारियों की सहभागिता से एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें सतत अपशिष्ट प्रबंधन, डस्टबिन का प्रयोग और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को कम करने पर जोर दिया गया। इस दौरान यात्रियों को पंपलेट भी बांटे गए।
मालदा टाउन: प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीन का प्रदर्शन
मालदा टाउन स्टेशन पर जैविक और अजैविक कचरे के पृथक्करण पर विशेष बल दिया गया। साथ ही प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीन (PBCM) की कार्यप्रणाली का लाइव प्रदर्शन किया गया। इससे यात्रियों को कचरे के सही प्रबंधन की दिशा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया।
हरियाली बढ़ाने के लिए पौधारोपण
जमालपुर डीज़ल शेड में 22 सितम्बर को वरिष्ठ डीएमई (डीज़ल) श्री कृष्ण कुमार दास के नेतृत्व में 50 पौधे लगाए गए। इस पहल से शेड परिसर की हरियाली में और वृद्धि हुई।
अभियान का सार
इन सभी पहलों ने न केवल रेलकर्मियों की सृजनात्मकता को सामने लाया बल्कि समाज को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया। मंडल रेल प्रबंधक श्री मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित इस अभियान ने “कम करना, पुनः प्रयोग करना और पुनर्चक्रण” की भावना को सशक्त रूप से स्थापित किया है।


