HIGHLIGHTS: पारू थाने में मातम और सन्नाटा
- सनसनीखेज वारदात: पारू थाने में तैनात महिला सिपाही का शव थाने के पास ही स्थित किराये के मकान से बरामद।
- लखीसराय का कनेक्शन: मृतका मूल रूप से लखीसराय जिले की रहने वाली थी; पति के साथ निजी मकान में रहती थी।
- विवाद का साया: पड़ोसियों और सूत्रों के अनुसार, मौत से पहले पति-पत्नी के बीच हुई थी तीखी नोकझोंक और मारपीट।
- जांच का केंद्र: पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि यह आत्महत्या है या कोई गहरी साजिश?
वारदात का ‘फाइल’ रिकॉर्ड: एक नजर में
- मृतका का पद: महिला कांस्टेबल (पारू थाना, मुजफ्फरपुर)।
- मूल निवास: लखीसराय जिला।
- घटनास्थल: पारू थाने के समीप स्थित एक निजी किराये का कमरा।
- प्राथमिक सुराग: पारिवारिक कलह और पति द्वारा मारपीट किए जाने की आशंका।
- पुलिस की कार्रवाई: शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया; वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद।
मुजफ्फरपुर (पारू) | 18 मार्च, 2026
मुजफ्फरपुर पुलिस महकमे में आज उस वक्त शोक और सनसनी फैल गई, जब पारू थाने में तैनात एक महिला कांस्टेबल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर आई। थाने से चंद कदमों की दूरी पर स्थित एक किराये के मकान में रहने वाली इस जांबाज सिपाही का शव मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच में मामला जितना सीधा दिख रहा है, उसके पीछे की कहानी उतनी ही उलझी हुई नजर आ रही है।
“आधी रात का झगड़ा और खामोश सुबह”
लखीसराय की रहने वाली महिला कांस्टेबल अपने पति के साथ पारू में रहती थी। पुलिस सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार:
- पारिवारिक विवाद: पिछले कुछ समय से दोनों के बीच अनबन चल रही थी।
- मारपीट के निशान: चर्चा है कि घटना से ठीक पहले पति-पत्नी के बीच जोरदार बहस हुई थी और पति ने महिला सिपाही के साथ मारपीट भी की थी।
- संदिग्ध परिस्थितियां: सुबह जब कांस्टेबल ड्यूटी पर नहीं पहुंची और कमरे से कोई हलचल नहीं हुई, तब जाकर मामला खुला और शव बरामद किया गया।
VOB का नजरिया: जब रक्षक ही घर के ‘दंश’ का शिकार हो जाए!
एक महिला कांस्टेबल, जो दिन-रात समाज की सुरक्षा और कानून के पालन में जुटी रहती थी, वह खुद अपने ही घर की दहलीज के भीतर असुरक्षित थी—यह समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। क्या खाकी वर्दी पहनने के बाद भी एक महिला घरेलू हिंसा की बेड़ियों से आजाद नहीं हो पाती? ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि पुलिस को इस मामले में ‘प्रोफेशनल ईगो’ छोड़कर निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। अगर यह आत्महत्या है, तो उकसाने वाले को सजा मिले, और अगर यह हत्या है, तो ‘वर्दी’ का अपमान करने वाले गुनहगार को ऐसी सजा मिले जो नजीर बन जाए।


