सुप्रीम कोर्ट सख्त: डिजिटल अरेस्ट ‘ठगी’ नहीं, ‘डकैती’ है; 54 हजार करोड़ की लूट पर केंद्र को अल्टीमेटम, 1 महीने में बनेगी गाइडलाइन

नई दिल्ली | डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) के नाम पर देश में चल रही लूट पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (9 फरवरी 2026) को बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराधियों ने अब तक 54,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी की है। यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसे सामान्य अपराध नहीं माना जा सकता।

1. “यह लूट है, कई राज्यों के बजट से ज्यादा पैसा गया”

​सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।

  • तुलना: जजों ने कहा कि 54 हजार करोड़ की रकम देश के कई छोटे राज्यों के सालाना बजट (Annual Budget) से भी अधिक है।
  • टिप्पणी: कोर्ट ने इसे ‘लूट या डकैती’ (Dacoity) करार दिया है। कोर्ट का कहना है कि अपराधी तकनीक का सहारा लेकर घर बैठे लोगों को कंगाल कर रहे हैं और सिस्टम लाचार दिख रहा है।

2. एक महीने में SOP बनाने का आदेश

​कोर्ट ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हैं।

  • डेडलाइन: सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने के भीतर इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का मसौदा तैयार करने को कहा है।
  • मकसद: ताकि पुलिस और बैंक मिलकर तुरंत एक्शन ले सकें और ठगी का शिकार हुए लोगों का पैसा बचाया जा सके।

क्या है डिजिटल अरेस्ट?

​साइबर ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या नारकोटिक्स विभाग का अफसर बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं। वे झूठा केस (मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स) का डर दिखाकर पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लेते हैं और घर बैठे ही कैमरे के सामने रहने को मजबूर करते हैं। फिर गिरफ्तारी से बचने के नाम पर करोड़ों रुपये ट्रांसफर करवा लेते हैं।

निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती के बाद उम्मीद है कि अब साइबर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए कड़े नियम बनेंगे और पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम बेहतर होगा।

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