HIGHLIGHTS: सर्वे की सुस्ती पर सरकार का ‘हंटर’; अब रोजाना देना होगा हिसाब
- बड़ा एक्शन: उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा अब खुद हर 15 दिन पर करेंगे जमीन सर्वे की समीक्षा।
- पटना में ‘कमांड सेंटर’: भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय में बना स्पेशल मॉनिटरिंग सेल; पल-पल की प्रगति पर रहेगी नजर।
- डेडलाइन तय: पहले चरण के 20 जिलों में इस साल के अंत तक सर्वे पूरा करने का अल्टीमेटम।
- शेखपुरा बना ‘रोल मॉडल’: सर्वेक्षण कार्य में अंतिम चरण पर पहुंचा शेखपुरा; बाकी जिलों को भी इसी रफ्तार से काम करने का निर्देश।
पटना | 19 मार्च, 2026
बिहार में चल रहे विशेष जमीन सर्वेक्षण (Land Survey) को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा अब ‘फुल एक्शन’ मोड में आ गए हैं। राज्य में जमीन विवादों को जड़ से खत्म करने के इस महाभियान में अब किसी भी स्तर पर ‘सुस्ती’ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उपमुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि वह केवल रिपोर्ट नहीं देखेंगे, बल्कि हर 15 दिन में अधिकारियों के काम का ‘पोस्टमार्टम’ भी करेंगे।
“रोजाना का काम, शाम को हिसाब” — सख्त हुए मंत्री
उपमुख्यमंत्री ने सभी जिला बंदोबस्त अधिकारियों के लिए नया ‘वर्किंग चार्ट’ जारी किया है:
- डेली टारगेट: हर जिले को रोजाना का लक्ष्य तय करना होगा।
- इवनिंग रिव्यू: शाम को दिनभर के काम की समीक्षा होगी और उसी दिन रिपोर्ट मुख्यालय (Patna) भेजी जाएगी।
- जीरो टॉलरेंस: काम में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों पर अब सीधी और सख्त गाज गिरेगी।
दो चरणों का ‘प्रगति कार्ड’: कहाँ खड़ा है बिहार?
जमीन सर्वे की वर्तमान स्थिति को उपमुख्यमंत्री ने आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया:
- पहला चरण (20 जिले, 89 अंचल): यहाँ 67% से ज्यादा मौजों का ड्राफ्ट पब्लिकेशन हो चुका है। साल के अंत तक इसे 100% पूरा करने का लक्ष्य है।
- दूसरा चरण (36 जिले, 445 अंचल): यहाँ फिलहाल त्रिसीमाना (Boundary) और सीमा सत्यापन का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
VOB का नजरिया: क्या ‘मंत्री की मॉनिटरिंग’ से मिटेगा जमीन का जंजाल?
बिहार में जमीन सर्वे केवल एक प्रशासनिक काम नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की उम्मीदों और विवादों का समाधान है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि विजय कुमार सिन्हा का हर 15 दिन पर समीक्षा करने का फैसला उन ‘सुस्त’ अमीन और कानूनगो के लिए चेतावनी है जो काम को लटकाने के आदी हैं। शेखपुरा मॉडल को पूरे बिहार में लागू करना एक अच्छी रणनीति है।
लेकिन, असली चुनौती है ‘सटीकता’ की। जल्दबाजी में अगर सर्वे के आंकड़े गलत हुए, तो विवाद घटने के बजाय बढ़ सकते हैं। इसलिए मॉनिटरिंग सेल को न केवल ‘रफ्तार’ देखनी होगी, बल्कि ‘क्वालिटी’ पर भी पहरा देना होगा। अगर यह सर्वे सफल रहा, तो बिहार की अदालतों में जमीन के 60% मामले अपने आप खत्म हो जाएंगे।


