
पटना | 25 फरवरी, 2026: बिहार की राजनीति में अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के लिए मशहूर राजद एमएलसी सुनील सिंह ने एक बार फिर सरकार की नींद उड़ा दी है। बुधवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने नीतीश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना ‘शराबबंदी’ को सीधे निशाने पर लिया। सुनील सिंह ने केवल आलोचना नहीं की, बल्कि एक ऐसा चुनौतीपूर्ण दावा कर दिया है जिससे सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।
“प्रमाण चाहिए तो विधानसभा आ जाइए”: 27 फरवरी का अल्टीमेटम
सुनील सिंह ने शराबबंदी की विफलता पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोलते हुए कहा:
”अगर किसी को लगता है कि बिहार में शराबबंदी सफल है, तो मैं उसे खुली चुनौती देता हूँ। 27 फरवरी को सदन की कार्यवाही का अंतिम दिन है। अगर प्रमाण चाहिए, तो मैं सदन परिसर (Assembly Premises) के भीतर ही शराब की डिलीवरी कराकर दिखा सकता हूँ। जब गेट के बाहर और भीतर शराब आसानी से उपलब्ध है, तो यह पाबंदी कैसी?”
उन्होंने दावा किया कि 2016 के बाद शराब का उपभोग कम नहीं हुआ, बल्कि इसने एक समानांतर अवैध अर्थव्यवस्था खड़ी कर दी है।
‘सूखा नशा’ और कमीशनखोरी की ‘होम डिलीवरी’
MLC सुनील सिंह ने केवल शराब ही नहीं, बल्कि राज्य में बढ़ते नशीले पदार्थों के चलन पर भी चिंता जताई। उनके आरोपों के मुख्य बिंदु:
- सूखा नशा: शराबबंदी के साइड इफेक्ट के रूप में बिहार के युवाओं में अब ‘स्मैक’ और ‘सिंथेटिक ड्रग्स’ (सूखा नशा) तेजी से फैल रहा है।
- भ्रष्टाचार की गंगा: उन्होंने ‘हर घर नल-जल योजना’, सड़क और पुल निर्माण में भारी कमीशनखोरी का आरोप लगाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह शराब की होम डिलीवरी हो रही है, उसी तरह हर योजना में भ्रष्टाचार की ‘डिलीवरी’ भी सुनिश्चित की जा रही है।
नीतीश कुमार पर निजी तंज: “राजा राममोहन राय बनना चाहते हैं साहब”
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामाजिक सुधार अभियानों पर कटाक्ष करते हुए सुनील सिंह ने कहा कि केवल कानून बना देने से समाज नहीं बदलता।
- कागजी बदलाव: उन्होंने कहा कि कोई चाहता है कि उसे इतिहास में ‘राजा राममोहन राय’ की तरह याद किया जाए, लेकिन हकीकत यह है कि दहेज प्रथा और शराबखोरी आज भी धरातल पर वैसी ही है।
- दहेज का दंश: सरकारी दावों के बावजूद शादियों में दहेज का लेन-देन धड़ल्ले से जारी है, सरकार की नीतियां केवल विज्ञापनों तक सीमित हैं।
अमित शाह के दौरे पर सवाल: “ध्यान भटकाने की रणनीति”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तीन दिवसीय बिहार दौरे पर भी सुनील सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार में बराबर की हिस्सेदार है, फिर भी वे ‘समीक्षा’ का नाटक कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह दौरा असल मुद्दों (बेरोजगारी, पलायन) से ध्यान भटकाने और आगामी चुनाव के लिए जमीन तैयार करने का एक हिस्सा मात्र है।
VOB का नजरिया: क्या 27 फरवरी को होगा कोई बड़ा धमाका?
सुनील सिंह का यह बयान केवल एक राजनीतिक हमला है या उनके पास वाकई कोई पुख्ता ‘प्लान’ है, यह 27 फरवरी को ही साफ होगा। हालांकि, सदन परिसर जैसी सुरक्षित जगह पर शराब की डिलीवरी का दावा करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। अगर सुनील सिंह अपने दावे पर टिके रहते हैं, तो बजट सत्र का आखिरी दिन काफी हंगामेदार होने वाला है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


