
सुल्तानगंज। समाज में शिक्षक को ‘गुरु’ का दर्जा प्राप्त है, जिसे माता-पिता के बाद बच्चों का सबसे बड़ा संरक्षक माना जाता है। लेकिन जब वही संरक्षक ‘भक्षक’ बन जाए, तो रिश्तों और भरोसे की नींव दरक जाती है। बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक निजी ट्यूटर ने शिक्षा की आड़ में मासूमियत को तार-तार कर दिया। शनिवार, 18 अप्रैल 2026 की दोपहर पुलिस की मुस्तैदी ने एक ऐसे ‘डिजिटल शिकारी’ को दबोचा है, जो ट्यूशन पढ़ाने के बहाने नाबालिग बच्चों को अपनी हवस और विकृत मानसिकता का शिकार बनाता था। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जब उसके मोबाइल को खंगाला गया, तो उसमें मौजूद अश्लील और आपत्तिजनक वीडियो ने पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि उन तमाम माता-पिता के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो बंद कमरों में अपने बच्चों को ‘सुरक्षित’ मानकर शिक्षकों के हवाले छोड़ देते हैं। सुल्तानगंज पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
ब्लॉक गेट के पास पुलिस की नजर और संदिग्ध का ‘एस्केप प्लान’
इस पूरे मामले का खुलासा किसी सुनियोजित छापेमारी से नहीं, बल्कि पुलिस की सतर्क गश्त के दौरान हुआ। सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के ब्लॉक गेट के पास पुलिस की एक टीम नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने देखा कि एक युवक पुलिस की गाड़ी को देखते ही अपनी चाल तेज कर दी और संदिग्ध तरीके से भागने की कोशिश करने लगा। पुलिस को उसकी गतिविधियाँ असामान्य लगीं, जिसके बाद जवानों ने घेराबंदी कर उसे धर दबोचा। पकड़े जाने के बाद युवक बुरी तरह घबराया हुआ था और उसके पास मौजूद मोबाइल फोन को वह छिपाने की कोशिश कर रहा था।
पुलिस की टीम उसे तुरंत सुल्तानगंज थाना लेकर आई। शुरुआती पूछताछ में उसने अपना नाम और पेशा ‘ट्यूटर’ बताया, लेकिन उसके बयानों में काफी विरोधाभास था। जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की और उसके मोबाइल का लॉक खुलवाया, तो ‘गैलरी’ के भीतर छिपे वीडियो ने इस घिनौने अपराध की परतें खोल दीं। मोबाइल में कई ऐसे वीडियो मिले जिनमें वह नाबालिग बच्चों के साथ आपत्तिजनक और अमानवीय हरकतें करता हुआ दिखाई दे रहा था। इन वीडियो को देखकर यह स्पष्ट हो गया कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि आरोपी लंबे समय से इस घृणित कार्य में संलिप्त था।
अभिभावकों का क्रंदन: जब अपनी ही आँखों पर नहीं हुआ विश्वास
मोबाइल से बरामद वीडियो के आधार पर पुलिस ने संबंधित बच्चों के अभिभावकों को तुरंत थाने तलब किया। जब माता-पिता को वे वीडियो दिखाए गए, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वीडियो में दिख रहे बच्चे उनके ही थे, जिन्हें वे भविष्य संवारने के लिए इस ट्यूटर के पास भेजते थे। अभिभावकों ने रोते हुए बताया कि वे इस व्यक्ति पर अटूट विश्वास करते थे और इसे अपने घर के सदस्य की तरह मानते थे।
पूछताछ में यह बात सामने आई कि आरोपी ट्यूशन पढ़ाने के दौरान ही इन वारदातों को अंजाम देता था। वह अक्सर ऐसे समय का चुनाव करता था जब बच्चों के माता-पिता घर पर नहीं होते थे या किसी काम से बाहर गए होते थे। घर में बड़े-बुजुर्गों की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर वह बच्चों को डरा-धमकाकर या उन्हें प्रलोभन देकर उनके साथ गलत हरकतें करता था। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि उसने अपनी इन करतूतों का वीडियो भी बनाया, ताकि वह बाद में बच्चों को ब्लैकमेल कर सके या अपनी विकृत मानसिक संतुष्टि के लिए उन्हें बार-बार देख सके। पुलिस ने बच्चों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और उन्हें मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counseling) उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है।
पुलिस की कानूनी घेराबंदी और ‘पोक्सो एक्ट’ की तैयारी
सुल्तानगंज पुलिस ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। पुअनी रामानुज कुमार के लिखित बयान पर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपी के पास से बरामद मोबाइल फोन को सबसे बड़ा डिजिटल साक्ष्य (Digital Evidence) माना जा रहा है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए लैब भेजा जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने ये वीडियो कहीं सोशल मीडिया या डार्क वेब पर साझा तो नहीं किए थे। पुलिस इस मामले में ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम’ (POCSO Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर रही है।
थानाध्यक्ष ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। उसे गिरफ्तार कर मेडिकल जांच के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि क्या इस आरोपी ने अन्य इलाकों में भी बच्चों को अपना शिकार बनाया है। सुल्तानगंज पुलिस ने इस मामले में स्पीडी ट्रायल (त्वरित सुनवाई) की अनुशंसा करने का निर्णय लिया है, ताकि अपराधी को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिल सके और समाज में एक कड़ा संदेश जाए। रामानुज कुमार ने बताया कि पुलिस इस मामले की कड़ियों को जोड़ रही है ताकि चार्जशीट में कोई भी कमी न रहे।
शिक्षा जगत में आक्रोश और ‘होम ट्यूशन’ पर उठते सवाल
इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद सुल्तानगंज के स्थानीय निवासियों और प्रबुद्ध नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि शिक्षकों के वेश में ऐसे ‘भेड़िये’ समाज के लिए नासूर हैं। इस मामले ने ‘होम ट्यूशन’ की संस्कृति पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर माता-पिता काम की व्यस्तता के कारण बच्चों को घर पर ही अकेले ट्यूटर के साथ छोड़ देते हैं, जो उनकी सुरक्षा के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।
स्थानीय शिक्षाविदों ने मांग की है कि निजी तौर पर पढ़ाने वाले ट्यूटर्स का भी पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) अनिवार्य होना चाहिए। किसी भी अंजान व्यक्ति को घर के भीतर बच्चों के साथ अकेले छोड़ना अब एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कोचिंग संस्थानों और ट्यूशन सेंटरों के लिए भी सख्त गाइडलाइंस जारी की जाएं। आरोपी के घर के पास भी तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, जिसे देखते हुए पुलिस वहां भी गश्त कर रही है।
बाल सुरक्षा और अभिभावकों की सजगता: एक सामाजिक विमर्श
सुल्तानगंज की यह घटना एक अलार्म की तरह है। बाल अधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ की जानकारी देना अब समय की मांग है। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर पैनी नजर रखें। यदि बच्चा ट्यूशन जाने से कतरा रहा है, अचानक गुमसुम रहने लगा है या किसी विशेष व्यक्ति के नाम से डर रहा है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में अपराधी बच्चों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर उन्हें चुप रहने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसे में माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद की एक ऐसी पारदर्शी दीवार होनी चाहिए जहाँ बच्चा बिना किसी डर के अपनी बात साझा कर सके। सुल्तानगंज पुलिस ने भी अभिभावकों से अपील की है कि वे ट्यूशन के दौरान अचानक घर पहुँचकर या डिजिटल कैमरों के माध्यम से नजर रखें।
कानूनी प्रक्रिया और आगे की तफ्तीश
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस उसके पुराने रिकॉर्ड खंगाल रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह पहले कहाँ-कहाँ पढ़ा चुका है और वहां उसके खिलाफ कोई शिकायत तो नहीं थी। पुलिस ने जब्त मोबाइल फोन का डेटा रिकवर करने के लिए साइबर सेल की मदद ली है। मोबाइल में मौजूद वीडियो की संख्या और उनकी प्रकृति यह संकेत दे रही है कि यह कोई छोटा गिरोह भी हो सकता है जो बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के व्यापार में शामिल हो।
सुल्तानगंज थाना पुलिस ने पीड़ित परिवारों को सुरक्षा का पूरा भरोसा दिलाया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस केस को एक ‘मॉडल केस’ के रूप में लेंगे ताकि भविष्य में कोई भी बच्चों के साथ ऐसी हरकत करने की हिम्मत न कर सके। न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए पुलिस अभियोजन पक्ष के साथ मिलकर काम कर रही है। क्षेत्र के लोग भी इस मामले की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं और इंसाफ की मांग पर अड़े हुए हैं।


