सुल्तानगंज स्टेशन पर 12 मीटर चौड़ा फुट ओवर ब्रिज तैयार: आंधी-बारिश के बीच इंजीनियरिंग टीम ने बिछाए गर्डर, अब यात्रियों के लिए प्लेटफॉर्म बदलना होगा आसान

मालदा/सुल्तानगंज। भारतीय रेल की ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ (ABSS) के तहत सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक बड़ी तकनीकी बाधा पार कर ली गई है। पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने सुल्तानगंज स्टेशन पर 12 मीटर चौड़े फुट ओवर ब्रिज (FOB) के गर्डर लॉन्चिंग का काम सफलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से पूरा कर लिया है। पीरपैंती स्टेशन के बाद यह मालदा मंडल की दूसरी ऐसी बड़ी उपलब्धि है, जहाँ अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं देने की तैयारी की गई है। इस कार्य की सबसे बड़ी चुनौती मौसम की मार थी, जिसे इंजीनियरिंग टीम ने अपनी अटूट प्रतिबद्धता से मात दी है।

मौसम की चुनौती: भारी बारिश और आंधी के बीच चला ऑपरेशन

​यह ऑपरेशन किसी चुनौती से कम नहीं था। जिस समय गर्डर लॉन्चिंग का काम शुरू होना था, ठीक उससे पहले और काम के दौरान सुल्तानगंज और आसपास के इलाकों में मौसम ने करवट बदल ली। भारी बारिश, तेज आंधी और हवाओं के बीच 250 एमटी क्षमता वाली विशालकाय रोड क्रेन के जरिए लोहे के भारी-भरकम गर्डरों को पटरियों के ऊपर स्थापित करना जोखिम भरा काम था।

​बावजूद इसके, रेलवे की तकनीकी टीम ने 8/9 मई और 9/10 मई 2026 की दरम्यानी रात को निर्धारित 4 घंटे 30 मिनट के ‘ट्रैफिक ब्लॉक’ (रात 10:45 से 03:15 बजे तक) के भीतर ही इस काम को पूरा किया। गर्डरों को सटीक स्थान पर स्थापित करने के तुरंत बाद ब्लॉक को समाप्त कर दिया गया, जिससे ट्रेनों के परिचालन पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ा और यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।

तकनीकी बारीकियां: 250 टन की क्रेन से रखे गए 22 गर्डर

​सुल्तानगंज स्टेशन पर बन रहा यह नया फुट ओवर ब्रिज तकनीकी दृष्टि से काफी मजबूत और आधुनिक है।

  • ब्रिज की संरचना: यह FOB दो स्पैन (हल्कों) से युक्त है।
  • गर्डरों की संख्या: इस पूरे ढांचे में कुल 22 गर्डर लगाए जा रहे हैं।
  • वजन और लंबाई: प्रत्येक गर्डर की लंबाई लगभग 23 मीटर है और एक-एक गर्डर का वजन करीब 8.3 मीट्रिक टन है।
  • मशीनरी का उपयोग: इतने भारी गर्डरों को लॉन्च करने के लिए 250 एमटी क्षमता वाली विशेष रोड क्रेन का इस्तेमाल किया गया।

​यह कार्य मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) विनोद कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन और मालदा के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) मनीष कुमार गुप्ता के सतत सहयोग से संपन्न हुआ। मौके पर मुख्य अभियंता राकेश रंजन के नेतृत्व में गति शक्ति इकाई/मालदा की टीम ने सूक्ष्म नियोजन के साथ इस चुनौतीपूर्ण कार्य को अंजाम दिया।

यात्री सुविधाएं: भीड़भाड़ से मिलेगी मुक्ति, सुरक्षा होगी पुख्ता

​12 मीटर चौड़े इस नए फुट ओवर ब्रिज के बन जाने से सुल्तानगंज आने वाले लाखों रेल यात्रियों, विशेषकर श्रावणी मेले के दौरान आने वाले कांवरियों को बड़ी राहत मिलेगी।

  1. सुगम आवागमन: चौड़ाई अधिक होने के कारण प्लेटफॉर्म बदलते समय यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की नहीं होगी।
  2. भीड़ नियंत्रण: यह ब्रिज यात्री आवागमन को अधिक व्यवस्थित करेगा, जिससे प्लेटफॉर्म पर भीड़ का दबाव कम होगा।
  3. विश्वस्तरीय अनुभव: अमृत भारत योजना के तहत यह ब्रिज स्टेशन की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ यात्रियों को एक सहज और स्मार्ट यात्रा अनुभव प्रदान करेगा।

टीम वर्क और समन्वय की जीत

​इस कार्य की सफलता के पीछे मालदा मंडल के विभिन्न विभागों—इंजीनियरिंग, परिचालन (Operations), सिग्नल एवं दूरसंचार, और विद्युत विभाग—के बीच का गहरा समन्वय रहा। प्रतिकूल मौसम के बावजूद समय पर काम पूरा करना मंडल की परिचालन उत्कृष्टता और सुरक्षा के प्रति उसकी गंभीरता को दर्शाता है। मालदा मंडल ने स्पष्ट किया है कि वे यात्रियों को सुरक्षित और आधुनिक रेल सेवाएं देने के लिए निरंतर बुनियादी ढांचे के विस्तार पर काम कर रहे हैं। सुल्तानगंज स्टेशन का यह नया स्वरूप आने वाले दिनों में जिले के पर्यटन और परिवहन को नई गति प्रदान करेगा।

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