
भागलपुर/सुल्तानगंज। बिहार के भागलपुर जिले की राजनैतिक फिजाओं में शनिवार की सुबह एक ऐसी खबर लेकर आई जिसने पूरे अंग जनपद को स्तब्ध कर दिया है। सुल्तानगंज नगर परिषद के सभापति राजकुमार गुड्डू अब हमारे बीच नहीं रहे। पटना के मेदांता अस्पताल में पिछले ग्यारह दिनों से वेंटिलेटर पर मौत से जूझ रहे इस जननेता ने आखिरकार शनिवार, 09 मई 2026 को अंतिम सांस ली। 28 अप्रैल को सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में हुए उस खूनी तांडव की गूँज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि इस दुखद खबर ने लोगों के जख्मों को फिर से हरा कर दिया है। जहाँ एक ओर कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की हत्या ने प्रशासनिक महकमे को हिलाया था, वहीं सभापति का चले जाना सुल्तानगंज के सामाजिक और राजनैतिक जीवन के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है जिसकी भरपाई आने वाले कई दशकों तक मुमकिन नहीं होगी। अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (ICU) के बाहर खड़े सैकड़ों समर्थकों की दुआएं और चिकित्सकों की तमाम कोशिशें उस वक्त बेअसर साबित हुईं जब नियति ने अपना क्रूर फैसला सुना दिया।
वह काला दिन: जब गोलियों की तड़तड़ाहट से दहला था सरकारी दफ्तर
इस पूरी त्रासदी की पटकथा 28 अप्रैल 2026 की दोपहर को लिखी गई थी। सुल्तानगंज नगर परिषद का कार्यालय उस दिन सामान्य कामकाज में व्यस्त था। कार्यालय के भीतर टेंडर से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजी कार्यों का संपादन किया जा रहा था। किसी को इस बात का इल्म नहीं था कि कुछ ही पलों में सुल्तानगंज का गौरव कहा जाने वाला यह भवन रक्त रंजित होने वाला है। चश्मदीदों के अनुसार, हथियारबंद अपराधी फिल्मी अंदाज में सीधे कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार के चैंबर में दाखिल हुए। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, अपराधियों ने पदाधिकारी के सिर में गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
उसी समय सभापति राजकुमार गुड्डू भी वहां मौजूद थे। अपराधियों ने उन्हें भी अपना निशाना बनाया। गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच गुड्डू गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। दिनदहाड़े सरकारी कार्यालय के भीतर हुए इस हमले ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी थी, बल्कि अपराधियों के उस दुस्साहस को भी प्रदर्शित किया था जो व्यवस्था को चुनौती दे रहे थे। गुड्डू को आनन-फानन में स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पटना के वेदांता अस्पताल रेफर किया गया था।
11 दिनों का लंबा संघर्ष और मेदांता में अंतिम क्षण
पटना के वेदांता अस्पताल में राजकुमार गुड्डू को अत्याधुनिक चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही थी। उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक जहर फैलने और आंतरिक चोटों के कारण उनकी स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई थी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जिले के तमाम बड़े राजनेता लगातार अस्पताल प्रशासन और परिजनों के संपर्क में थे। 28 अप्रैल से लेकर आज 9 मई तक, सुल्तानगंज की जनता ने शायद ही कोई ऐसी सुबह देखी हो जब अजगैबीनाथ मंदिर में उनके स्वास्थ लाभ के लिए प्रार्थना न की गई हो।
विशेषज्ञों की एक टीम उनकी निगरानी कर रही थी, लेकिन शनिवार की सुबह उनके हृदय की गति धीमी होने लगी। डॉक्टर्स के अनुसार, संक्रमण और अधिक खून बह जाने के कारण उनके शरीर ने दवाओं पर प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया था। उनके निधन की खबर जैसे ही पटना से भागलपुर पहुँची, सुल्तानगंज बाजार में सन्नाटा पसर गया। लोग एक-दूसरे से इस खबर की पुष्टि करते हुए बिलख पड़े। जिस योद्धा ने 11 दिनों तक मौत की आंखों में आंखें डालकर संघर्ष किया, वह आखिरकार अनंत यात्रा पर निकल गया।
अपराधी रामधनी यादव का अंत और पुलिस का ‘जीरो टॉलरेंस’
इस दोहरे हत्याकांड (अब गुड्डू के निधन के बाद) के पीछे टेंडर और वर्चस्व की लड़ाई का गहरा एंगल सामने आया है। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मुख्य आरोपी रामधनी यादव ने ही इस पूरी साजिश को अंजाम दिया था। रामधनी यादव नगर परिषद की उपाध्यक्ष नीलम देवी का पति था, जो खुद को व्यवस्था से ऊपर मानता था। घटना के बाद भागलपुर पुलिस और एसटीएफ ने संयुक्त रूप से घेराबंदी शुरू की।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्पष्ट निर्देश थे कि अपराधियों में कानून का खौफ पैदा होना चाहिए। घटना के महज 24 घंटे के भीतर ही पुलिस और रामधनी यादव के बीच मुठभेड़ हुई। गिरफ्तारी के दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। इस मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए थे। हालांकि मुख्य आरोपी का अंत हो चुका था, लेकिन उसने सुल्तानगंज को जो जख्म दिए थे, वे आज राजकुमार गुड्डू के निधन के साथ और अधिक गहरे हो गए हैं। प्रशासन का दावा है कि इस मामले में संलिप्त अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है और स्पीडी ट्रायल के जरिए उन्हें फांसी के फंदे तक पहुँचाया जाएगा।
सांगठनिक कुशलता और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी थे गुड्डू
राजकुमार गुड्डू केवल एक सभापति नहीं थे, बल्कि वे भारतीय जनता पार्टी के एक समर्पित सिपाही के रूप में भी पहचाने जाते थे। पूर्व में भाजपा के मंडल अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी थी। उनके व्यवहार में एक ऐसी शालीनता थी जो विरोधियों को भी उनका मुरीद बना देती थी।
- व्यवहार कुशल: सुल्तानगंज की गलियों में उन्हें ‘भैया’ के नाम से पुकारा जाता था। वे जनता के बीच फाइलों के माध्यम से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत संवाद के माध्यम से जुड़ते थे।
- सामाजिक योगदान: सुल्तानगंज के विकास कार्यों, खासकर श्रावणी मेले के दौरान कांवड़ियों की सेवा और शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर उनके द्वारा किए गए कार्यों को हमेशा याद रखा जाएगा।
- अविस्मरणीय व्यक्तित्व: एक ऐसा नेता जो सत्ता के अहंकार से दूर, जमीन पर खड़ा रहकर लोगों की समस्याओं को सुलझाने में विश्वास रखता था।
सुल्तानगंज की सामाजिक और राजनैतिक क्षति
अजगैबीनाथ की पावन धरती के लिए यह एक अपूर्णीय क्षति है। सुल्तानगंज नगर परिषद में जिस तरह के विकास की कल्पना गुड्डू ने की थी, वह अधूरी रह गई। उनके निधन से नगर परिषद के भविष्य की कार्यप्रणाली पर भी गहरा असर पड़ेगा। एक तरफ जहाँ शहर में विकास योजनाओं को गति मिल रही थी, वहीं अब नेतृत्व का यह शून्य लंबे समय तक सालता रहेगा।
आज सुल्तानगंज का हर नागरिक गमगीन है। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपना जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि एक अभिभावक खो दिया है। वे अक्सर कहते थे कि सुल्तानगंज को वे विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होते देखना चाहते हैं। उनके जाने से न केवल उनका परिवार अनाथ हुआ है, बल्कि सुल्तानगंज की वह राजनैतिक विरासत भी सूनी हो गई है जिसे उन्होंने अपने पसीने से सींचा था।
पटना से भागलपुर तक शोक की लहर
राजकुमार गुड्डू के पार्थिव शरीर को पटना से भागलपुर लाने की तैयारी की जा रही है। जिला प्रशासन ने सुल्तानगंज में सुरक्षा के कड़े पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि अंतिम दर्शन के दौरान कोई अव्यवस्था न हो। मुख्यमंत्री ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे बिहार की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति बताया है।
सुल्तानगंज बाजार के व्यापारियों ने उनके सम्मान में स्वतः स्फूर्त ढंग से अपनी दुकानें बंद रखने का निर्णय लिया है। उनके आवास पर समर्थकों का तांता लगा हुआ है, जहाँ हर आँख नम है और हर जुबान पर उनकी यादें हैं। अपराधियों की जिस गोली ने 28 अप्रैल को सुल्तानगंज की शांति भंग की थी, उसने आज एक ऐसी चिराग को बुझा दिया है जिसकी रोशनी से पूरा शहर जगमगाता था।
भागलपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ हैं और यह सुनिश्चित करेंगे कि इस मामले में किसी भी गुनहगार को बख्शा न जाए। राजकुमार गुड्डू का संघर्ष, उनकी सादगी और उनका मृदुभाषी स्वभाव सुल्तानगंज की आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बना रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके शोकाकुल परिवार को इस असहनीय पीड़ा को सहने की शक्ति प्रदान करें।


