सुल्तानगंज गोलीकांड: वेंटिलेटर पर मौत से जूझ रहे मुख्य पार्षद, शरीर में अब भी फंसी हैं दो गोलियां; पटना में सातवें दिन भी हालत बेहद नाजुक

सुल्तानगंज/पटना। सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय के उस खौफनाक मंजर को आज सात दिन बीत चुके हैं, जिसने न केवल प्रशासनिक गलियारों को दहला दिया था, बल्कि पूरे अंग क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए थे। नगर परिषद कार्यालय में हुए उस सनसनीखेज गोलीकांड के जख्म अब भी हरे हैं, क्योंकि इस घटना में गंभीर रूप से घायल मुख्य पार्षद राजकुमार गुड्डू की हालत सातवें दिन भी अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। मंगलवार, 05 मई 2026 की ताजा जानकारी के अनुसार, राजकुमार गुड्डू पटना के एक निजी अस्पताल के सघन चिकित्सा कक्ष (ICU) में अपनी जिंदगी की सबसे कठिन जंग लड़ रहे हैं। सात दिन पहले हुई उस हिंसक वारदात ने उनके शरीर को जो नुकसान पहुँचाया है, उससे उबरना अब पूरी तरह से ईश्वरीय चमत्कार और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मेल पर टिका हुआ है। अस्पताल के भीतर सन्नाटा है, लेकिन बाहर उनके समर्थकों और सुल्तानगंज की जनता की धड़कनें तेज हैं, जो पल-पल की जानकारी के लिए बेचैन हैं।

जिंदगी और मौत के बीच झूलती सांसें: पटना में जारी है संघर्ष

​सुल्तानगंज से घायल अवस्था में पटना लाए जाने के बाद से ही राजकुमार गुड्डू की स्थिति में कोई बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला है। पटना के निजी अस्पताल में वे सात दिनों से लगातार जिंदगी और मौत के बीच के उस धुंधले फासले पर खड़े हैं, जहाँ हर पल एक नई चुनौती पेश कर रहा है। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है, लेकिन स्थिति अब भी उनके नियंत्रण से बाहर बताई जा रही है।

​चिकित्सकीय जांच और रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्य पार्षद के शरीर में अब भी दो घातक गोलियां फंसी हुई हैं। गोलियों का स्थान इतना संवेदनशील है कि उन्हें निकालना इस समय किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है। प्राप्त जानकारी के अनुसार:

  • ​एक गोली राजकुमार गुड्डू की छाती के पास धंसी हुई है।
  • ​दूसरी गोली उनके सिर में फंसी हुई है, जो सबसे बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है।

​सिर और छाती जैसे महत्वपूर्ण अंगों में गोलियों का होना अंगों की कार्यक्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। सात दिन बीत जाने के बाद भी इन गोलियों को न निकाल पाना यह दर्शाता है कि उनका शरीर इस समय किसी भी बड़े ऑपरेशन को झेलने की स्थिति में नहीं है।

सर्जरी में रुकावट: अस्थिर वाइटल्स और वेंटिलेटर का सहारा

​राजकुमार गुड्डू के स्वास्थ्य के संबंध में पार्षद प्रतिनिधि सुभाष पोद्दार ने जो जानकारियां साझा की हैं, वे काफी विचलित करने वाली हैं। उनके मुताबिक, डॉक्टरों ने कई बार सर्जरी करने का प्रयास करने के बारे में सोचा, लेकिन उनके शरीर के मुख्य मानक (Vitals) इसका साथ नहीं दे रहे हैं।

  • ​राजकुमार गुड्डू का ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) लगातार अनियंत्रित बना हुआ है।
  • ​उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर भी स्थिर नहीं रह पा रहा है।
  • ​इन्हीं कारणों से उनकी जरूरी सर्जरी को फिलहाल टाल दिया गया है।

​वर्तमान में, घायल मुख्य पार्षद को पूरी तरह से वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। उनके फेफड़े और दिल मशीनी सहायता के जरिए काम कर रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि जब तक रक्तचाप और ऑक्सीजन का स्तर सामान्य सीमा में नहीं आता, तब तक उन्हें ऑपरेशन थिएटर में ले जाना आत्मघाती कदम हो सकता है। यह चिकित्सा जगत की वह विडंबना है जहाँ दुश्मन (गोलियां) शरीर के भीतर हैं, लेकिन उन्हें निकालने का रास्ता मरीज की शारीरिक कमजोरी ने रोक रखा है।

अचेत अवस्था और लगातार रक्त संचार: डॉक्टरों की चुनौती

​गोलीकांड के सात दिन बीत जाने के बाद भी राजकुमार गुड्डू को अब तक होश नहीं आया है। वे लगातार अचेत (Unconscious) अवस्था में हैं। डॉक्टरों के लिए यह कोमा जैसी स्थिति एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि बिना चेतना के मरीज की आंतरिक रिकवरी का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। अस्पताल सूत्रों की मानें तो:

  • ​24 घंटे डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम उनकी स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
  • ​उनके शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए लगातार बाहर से खून चढ़ाया जा रहा है।
  • ​आईसीयू के भीतर हर सेकंड उनकी ईसीजी और अन्य मापदंडों की मॉनिटरिंग की जा रही है।

​डॉक्टरों का कहना है कि जैसे ही उनकी शारीरिक स्थिति ऑपरेशन के अनुकूल होगी, तुरंत गोलियां निकालने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। लेकिन वह ‘अनुकूल स्थिति’ कब आएगी, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। भारी मात्रा में रक्त स्राव होने और अंदरूनी अंगों में चोट लगने के कारण संक्रमण का खतरा भी बना रहता है, जिसे रोकने के लिए उच्च क्षमता वाली एंटीबायोटिक्स दी जा रही हैं।

सुल्तानगंज में पसरा सन्नाटा: न्याय और स्वास्थ्य की दुआएं

​इधर पटना में राजकुमार गुड्डू अपनी सांसों के लिए लड़ रहे हैं, उधर सुल्तानगंज में उनके समर्थकों और नगर परिषद के कर्मियों के बीच गहरा तनाव व्याप्त है। नगर परिषद कार्यालय में हुई उस फायरिंग ने न केवल एक राजनेता को घायल किया, बल्कि स्थानीय प्रशासन के इकबाल को भी चुनौती दी है। लोगों में इस बात को लेकर काफी गुस्सा है कि कार्यालय जैसी सुरक्षित जगह पर इस तरह की वारदात को कैसे अंजाम दिया गया।

​सुभाष पोद्दार और अन्य करीबी लगातार पटना में डटे हुए हैं और अस्पताल के गलियारों में किसी अच्छे समाचार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सुल्तानगंज के विभिन्न मंदिरों में उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए पूजा-पाठ और दुआओं का दौर जारी है। लोगों का कहना है कि राजकुमार गुड्डू ने नगर के विकास के लिए काफी काम किए थे और उनका इस तरह मौत के करीब पहुँचना पूरे शहर के लिए एक बड़ा झटका है। शहर की सड़कों पर चर्चा का विषय केवल अस्पताल की बुलेटिन है। लोग सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या गोलियां निकाली जा सकीं या क्या उन्हें होश आया।

प्रशासनिक शून्यता और सुरक्षा पर सवाल

​मुख्य पार्षद की अनुपस्थिति में सुल्तानगंज नगर परिषद का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। हालांकि, प्राथमिकता इस समय उनके जीवन को बचाना है। पुलिस विभाग इस मामले की जांच में जुटा है, लेकिन मुख्य पार्षद का बयान इस केस में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। उनके अचेत होने के कारण पुलिस को भी जांच की दिशा तय करने में कठिनाई हो रही है।

​चिकित्सकों के अनुसार, आने वाले 48 से 72 घंटे उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण (Critical) हैं। यदि इस दौरान उनके वाइटल्स स्थिर होते हैं, तो डॉक्टर सिर की गोली निकालने का जटिल ऑपरेशन कर सकते हैं। सिर की चोट अक्सर न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं पैदा करती है, इसलिए रिकवरी के बाद भी स्थिति क्या होगी, यह कहना जल्दबाजी होगी। फिलहाल, पूरा सुल्तानगंज और राजकुमार गुड्डू का परिवार उस एक पल का इंतजार कर रहा है जब वेंटिलेटर की मशीनें शांत हों और वे अपनी आंखें खोल सकें। पटना के अस्पताल का वह कमरा इस समय एक ऐसी राजनैतिक और व्यक्तिगत त्रासदी का केंद्र बना हुआ है, जिसका समाधान केवल समय और ईश्वर के हाथ में नजर आता है।

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