
भागलपुर, 19 अप्रैल 2026। भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड में इन दिनों घरेलू गैस सिलेंडर की भारी किल्लत ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि गैस उपभोक्ताओं को घंटों तक तपती धूप में लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है, फिर भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। इससे न केवल लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, बल्कि घरों में खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है।
सुल्तानगंज शहर स्थित इंडिया अनुराधा गैस गोदाम के बाहर हर दिन सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग जाती हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा—सभी गैस सिलेंडर पाने की उम्मीद में घंटों तक इंतजार करते नजर आते हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे सुबह 9 बजे से लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन 3-4 घंटे बीत जाने के बाद भी उनका नंबर नहीं आता।
कई लोगों ने बताया कि गैस एजेंसी की ओर से केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को सिलेंडर दिया जा रहा है, जिनका ‘डीसी नंबर’ (डिलीवरी कन्फर्मेशन नंबर) आया है। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता हैं, जिनका डीसी नंबर अभी तक जारी नहीं हुआ है, जबकि उन्होंने 30-35 दिन पहले ही गैस बुकिंग कराई थी।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस बुकिंग के लिए दिए गए नंबर पर बार-बार कॉल करने के बावजूद कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। कुछ लोगों को डीसी नंबर मिल जाता है, जबकि कई लोगों को नहीं, जिससे भ्रम और नाराजगी दोनों बढ़ रही है।
एक महिला उपभोक्ता ने बताया, “हम लोग कई दिनों से गैस के लिए परेशान हैं। घर में खाना बनाना मुश्किल हो गया है। सुबह से लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन खाली हाथ लौटना पड़ता है।”
स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है, जब कुछ उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसी से सिलेंडर लेने के बाद उसमें पर्याप्त गैस नहीं होती। कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्हें आधा भरा या कम गैस वाला सिलेंडर दिया गया, जिसे वे वापस करने के लिए गोदाम पहुंचे।
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिला पदाधिकारी ने पहले कहा था कि जिले में गैस की कोई किल्लत नहीं है और सभी उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि हकीकत में हर घर में गैस की कमी देखी जा रही है। लोगों ने आरोप लगाया कि अधिकारी इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
सबसे गंभीर आरोप गैस सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग को लेकर सामने आ रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि जहां एक ओर सरकारी गोदाम में उन्हें सिलेंडर नहीं मिल रहा, वहीं दूसरी ओर बाजार में ऊंचे दामों पर आसानी से गैस सिलेंडर उपलब्ध हो जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लोग खुलेआम गैस सिलेंडर की कालाबाजारी कर रहे हैं और जरूरतमंद उपभोक्ताओं को मजबूरी में ज्यादा पैसे देकर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
गौर करने वाली बात यह है कि जब गोदाम में गैस सिलेंडर उपलब्ध हैं, तो फिर उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर क्यों नहीं मिल पा रहा है? यह सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
लोगों ने मांग की है कि प्रशासन इस मामले की गंभीरता से जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि गैस सिलेंडर का वितरण पारदर्शी तरीके से हो। साथ ही, ब्लैक मार्केटिंग में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
इस समस्या का असर केवल घरेलू कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लोगों के जीवन की सामान्य गति भी प्रभावित हो रही है। कई परिवारों को मजबूरी में लकड़ी या अन्य वैकल्पिक ईंधन का सहारा लेना पड़ रहा है, जो न केवल असुविधाजनक है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समस्याएं आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में गड़बड़ी या प्रबंधन की कमी के कारण उत्पन्न होती हैं। यदि समय पर योजना बनाकर वितरण किया जाए और निगरानी मजबूत की जाए, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।
कुल मिलाकर, सुल्तानगंज में गैस सिलेंडर की किल्लत एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जिसने आम लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया है। अब जरूरत है कि प्रशासन इस मुद्दे पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करे, ताकि लोगों को राहत मिल सके और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति सुचारु रूप से हो सके।


