सुल्तानगंज गोलीकांड: CID जांच तेज, डीआईजी जयंत कांत ने किया घटनास्थल का निरीक्षण

भागलपुर, 29 अप्रैल 2026। भागलपुर के सुल्तानगंज में हुए चर्चित गोलीकांड मामले में जांच अब और तेज हो गई है। इस बहुचर्चित मामले में सीआईडी की टीम सक्रिय हो गई है और वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद घटनास्थल का दौरा कर जांच को आगे बढ़ाया है।

सीआईडी के डीआईजी ने टीम के साथ सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। उनके साथ सीआईडी के एसपी समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

घटनास्थल पर गहन जांच

अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम का विस्तृत अध्ययन किया।

जांच के दौरान फायरिंग की दिशा, घटनास्थल की स्थिति, संभावित साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का सूक्ष्म निरीक्षण किया गया।

सीआईडी टीम ने स्थानीय पुलिस अधिकारियों से भी घटना से जुड़ी जानकारी ली और अब तक की जांच की प्रगति की समीक्षा की।

मामला क्यों बना चर्चा का विषय

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है, जिसने इसे और संवेदनशील बना दिया है।

बताया जा रहा है कि मुठभेड़ में मारे गए मुख्य आरोपी रामधनी यादव की पत्नी नीलम देवी सुल्तानगंज नगर परिषद की उप सभापति हैं।

इस तथ्य के सामने आने के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी की हत्या के बाद मुख्य आरोपी रामधनी यादव की तलाश की जा रही थी।

पुलिस के अनुसार, आरोपी को हथियार बरामदगी के लिए ले जाया जा रहा था, तभी उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी।

इसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की, जिसमें रामधनी यादव गंभीर रूप से घायल हो गया।

उसे इलाज के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस कार्रवाई और सवाल

पुलिस का दावा है कि मुठभेड़ आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई थी, जबकि कुछ लोग इस घटना को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।

ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीआईडी को जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि हर पहलू की गहराई से जांच हो सके।

साक्ष्य जुटाने में जुटी टीम

सीआईडी टीम तकनीकी और भौतिक साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।

घटनास्थल से मिले सबूतों, सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीद गवाहों के बयान के आधार पर पूरी घटना की कड़ी जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

इसके अलावा पुलिस टीम उन परिस्थितियों की भी जांच कर रही है, जिनमें आरोपी को हिरासत में लेकर ले जाया जा रहा था और अचानक फायरिंग की घटना हुई।

कानून-व्यवस्था और सुरक्षा पर असर

इस घटना ने एक बार फिर बिहार में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है।

जहां एक ओर पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

प्रशासन का रुख

प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाएगी।

दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद या प्रभाव का क्यों न हो।

सुल्तानगंज गोलीकांड अब एक संवेदनशील और बहुचर्चित मामला बन चुका है, जिसमें पुलिस कार्रवाई, राजनीतिक जुड़ाव और जांच की निष्पक्षता जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं।

सीआईडी की सक्रियता से उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पूरे राज्य की नजर इस जांच पर टिकी हुई है, क्योंकि यह मामला कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों की परीक्षा बन गया है।

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