
भागलपुर। सुल्तानगंज नगर परिषद के चेयरमैन राजकुमार गुड्डू को रविवार को नम आंखों के बीच अंतिम विदाई दी गई। अजगैबीनाथ गंगा घाट पर पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सबसे भावुक पल तब देखने को मिला, जब उनके 12 साल के बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। घाट पर मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर खुद को संभाल नहीं सके। परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, समर्थक और हजारों की संख्या में पहुंचे स्थानीय लोग गमगीन माहौल में अपने प्रिय जनप्रतिनिधि को अंतिम विदाई देते नजर आए।
राजकुमार गुड्डू की मौत शनिवार को पटना में इलाज के दौरान हुई थी। वे पिछले 12 दिनों से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे। 28 अप्रैल को सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में घुसकर अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना भेजा गया था, जहां आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया।
आवास पर सुबह से उमड़ी लोगों की भीड़
रविवार सुबह जैसे ही राजकुमार गुड्डू का पार्थिव शरीर उनके आवास पर पहुंचा, इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। सुबह से ही उनके घर के बाहर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। हर कोई अंतिम दर्शन करना चाहता था। घर के बाहर सन्नाटा और रोने-बिलखने की आवाजें माहौल को और अधिक भावुक बना रही थीं।
स्थानीय लोगों का कहना था कि राजकुमार गुड्डू केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं बल्कि आम लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले व्यक्ति थे। यही वजह रही कि उनके अंतिम दर्शन के लिए सुल्तानगंज ही नहीं, आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
मिठाई दुकान पर दी गई श्रद्धांजलि
अंतिम यात्रा शुरू होने से पहले उनके पार्थिव शरीर को बाजार स्थित उनकी मिठाई दुकान पर ले जाया गया। यही वह जगह थी जहां से उन्होंने अपने सामाजिक और राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। दुकान पर लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कई लोग पार्थिव शरीर को देखकर भावुक हो उठे और अपने आंसू नहीं रोक सके।
दुकान के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई थी। स्थानीय व्यापारी, समाजसेवी, राजनीतिक कार्यकर्ता और आम नागरिक एक-एक कर अंतिम दर्शन करते रहे। लोगों ने कहा कि राजकुमार गुड्डू ने हमेशा आम लोगों के बीच रहकर काम किया और यही कारण है कि उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई।
‘अमर रहे’ के नारों से गूंजा इलाका
जब अंतिम यात्रा उनके आवास से निकली तो माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने कंधा देकर अंतिम यात्रा को आगे बढ़ाया। रास्तेभर “राजकुमार गुड्डू अमर रहे” और “भारत माता की जय” के नारे गूंजते रहे।

अंतिम यात्रा सुल्तानगंज बाजार के विभिन्न मार्गों से होती हुई अजगैबीनाथ गंगा घाट पहुंची। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने फूल बरसाकर श्रद्धांजलि दी। कई लोग अपने घरों और दुकानों के बाहर खड़े होकर नम आंखों से अंतिम दर्शन करते दिखाई दिए।
महिलाएं छतों और बालकनियों से अंतिम यात्रा को देख रही थीं, जबकि युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी संख्या जुलूस के साथ चलती रही। पूरा इलाका शोक में डूबा नजर आया।
घाट पर भावुक कर देने वाला दृश्य
अजगैबीनाथ गंगा घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया। परिवार के लोग लगातार रोते रहे। इस बीच सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब राजकुमार गुड्डू के 12 साल के बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। घाट पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
बताया जा रहा है कि बेटा काफी देर तक एकटक अपने पिता के पार्थिव शरीर को देखता रहा। वहां मौजूद कई लोग इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे। परिवार के सदस्य बेटे को संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन माहौल इतना दर्दनाक था कि हर किसी की आंखें भर आईं।
प्रशासन रहा पूरी तरह अलर्ट
राजकुमार गुड्डू की हत्या का मामला पहले से ही काफी चर्चित रहा है। ऐसे में अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया।
विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। सुल्तानगंज इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार, प्रशिक्षु एएसपी सायम रजा समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
28 अप्रैल को हुई थी ताबड़तोड़ फायरिंग
गौरतलब है कि 28 अप्रैल की शाम करीब चार बजे सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई थी, जब हथियारबंद अपराधी अचानक अंदर घुस आए। उस समय नगर परिषद के चेयरमैन राजकुमार गुड्डू और एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कृष्णा भूषण मीटिंग कर रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अपराधियों ने घुसते ही अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। हमलावरों का मुख्य निशाना राजकुमार गुड्डू थे। गोलीबारी के दौरान बीच-बचाव करने पहुंचे एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कृष्णा भूषण को भी गोली लग गई और उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
हमले में गंभीर रूप से घायल राजकुमार गुड्डू को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, फिर बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया गया था। वहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनका इलाज कर रही थी, लेकिन 12 दिनों तक जिंदगी से जंग लड़ने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।
इलाके में शोक और आक्रोश
राजकुमार गुड्डू की मौत के बाद पूरे सुल्तानगंज इलाके में शोक का माहौल है। लोग इस घटना को लेकर दुख और आक्रोश दोनों जाहिर कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिनदहाड़े नगर परिषद कार्यालय में घुसकर हुई गोलीबारी ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच तेजी से चल रही है और अपराधियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
राजकुमार गुड्डू की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने यह साफ कर दिया कि वे इलाके में कितने लोकप्रिय थे। अब उनके निधन के बाद सुल्तानगंज की राजनीति और सामाजिक जीवन में एक बड़ा खालीपन महसूस किया जा रहा है।


