​खुशी का सफर मातम में बदला: मैट्रिक में सफलता के बाद देवघर जा रहे रक्सौल के छात्र की अजगैविनाथ गंगा में डूबने से मौत

सुल्तानगंज/भागलपुर। नियति का क्रूर खेल कभी-कभी इंसान की सबसे बड़ी खुशियों को गहरे जख्मों में बदल देता है। भागलपुर जिले के सुल्तानगंज स्थित ऐतिहासिक अजगैविनाथ गंगा धाम से एक ऐसी ही हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने न केवल रक्सौल के एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि सावन के इस पावन महीने के आगमन से पहले ही सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्वी चंपारण के रक्सौल से देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए निकले तीन दोस्तों के जत्थे की यात्रा उस समय त्रासदी में तब्दील हो गई, जब गंगा स्नान के दौरान 16 वर्षीय मेधावी छात्र आदर्श कुमार गहरे पानी की लहरों में समा गया। विडंबना यह है कि आदर्श हाल ही में बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुआ था और इसी सफलता का आभार व्यक्त करने वह अपने भाई और मित्र के साथ सुल्तानगंज के रास्ते देवघर जा रहा था। जिस गंगा की लहरों से आशीर्वाद लेकर उसे आगे बढ़ना था, उन्हीं लहरों ने उसके जीवन का अंत कर दिया। घटना के बाद से अजगैविनाथ घाट पर कोहराम मचा हुआ है और पुलिस प्रशासन के साथ-साथ एसडीआरएफ की टीमें लापता छात्र की तलाश में जुटी हुई हैं।

मैट्रिक की सफलता और देवघर की संकल्प यात्रा

​रक्सौल के टुमरिया टोला निवासी रितेश ठाकुर का पुत्र आदर्श कुमार एक होनहार छात्र था। हाल ही में घोषित मैट्रिक के परिणामों में उसने प्रथम श्रेणी हासिल की थी, जिससे पूरे परिवार और टोले में खुशी का माहौल था। अपनी इस सफलता को ईश्वर का आशीर्वाद मानते हुए आदर्श ने सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर देवघर में बाबा भोलेनाथ पर चढ़ाने का संकल्प लिया था। सोमवार को वह अपने भाई आर्यन शर्मा और अपने अभिन्न मित्र आर्यन कुमार (पुत्र झुन्ना राम) के साथ उत्साहपूर्वक घर से निकला था।

​तीनों दोस्त सुल्तानगंज पहुँचे और परंपरा के अनुसार देवघर प्रस्थान करने से पहले उन्होंने अजगैविनाथ गंगा घाट पर स्नान करने का फैसला किया। दोपहर के करीब 12 बज रहे थे और घाट पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ पल इस परिवार के लिए जीवन भर का मातम लेकर आने वाले हैं। आदर्श अपने साथियों के साथ पानी में उतरा, लेकिन गंगा की गहराई और अचानक आए ढलान ने उसे संभलने का मौका नहीं दिया।

पैर फिसला और मौत की गहराई में समा गया ‘आदर्श’

​घटना के चश्मदीद और आदर्श के भाई आर्यन शर्मा ने फफकते हुए बताया कि वे लोग किनारे पर ही स्नान कर रहे थे। इसी दौरान अचानक आदर्श का पैर फिसला और वह असंतुलित होकर गहरे पानी की ओर चला गया। गंगा की धार वहाँ काफी तेज थी और नीचे की जमीन धंसी हुई थी। आदर्श को डूबता देख आर्यन शर्मा और उनके मित्र आर्यन कुमार ने अपनी जान जोखिम में डालकर उसे बचाने की पूरी कोशिश की।

​आर्यन शर्मा के अनुसार, “हमने उसका हाथ पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि हम खुद भी डूबने लगे। ऐसा लग रहा था कि हम तीनों ही आज वापस नहीं जा पाएंगे। किसी तरह हमने अपनी जान बचाई और किनारे की ओर आए, लेकिन हमारी आँखों के सामने ही आदर्श लहरों के बीच ओझल हो गया।” घाट पर मौजूद अन्य लोग जब तक सक्रिय होते और मदद के लिए आगे आते, तब तक आदर्श काफी दूर निकल चुका था। यह मंजर इतना खौफनाक था कि किनारे खड़े अन्य श्रद्धालुओं के बीच भी अफरा-तफरी मच गई।

प्रशासनिक निष्क्रियता और एसडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन

​हादसे की खबर मिलते ही सुल्तानगंज पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति का जायजा लिया। आनन-फानन में एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को सूचित किया गया। करीब एक घंटे की देरी के बाद रेस्क्यू टीम मोटर बोट और गोताखोरों के साथ अजगैविनाथ घाट पहुँची। गोताखोरों ने उन संभावित जगहों पर जाल डाला और पानी के भीतर तलाशी शुरू की जहाँ आदर्श के डूबने की आशंका थी।

​दोपहर से लेकर देर शाम तक सर्च ऑपरेशन जारी रहा, लेकिन गंगा की तेज धारा और गाद के कारण सफलता हाथ नहीं लगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर में उतार-चढ़ाव और नीचे की मिट्टी का कटाव सर्च ऑपरेशन में बाधा बन रहा है। सुल्तानगंज थानाध्यक्ष ने बताया कि रक्सौल स्थित पीड़ित परिवार को सूचित कर दिया गया है। फिलहाल पुलिस की टीम घाट पर तैनात है और स्थानीय मल्लाहों की भी मदद ली जा रही है। रेस्क्यू टीम ने अपने सर्च दायरे को बढ़ाकर जहाज घाट और सीढ़ी घाट तक कर दिया है।

सुल्तानगंज के खतरनाक घाट: सुरक्षा के दावों की खुली पोल

​अजगैविनाथ गंगा घाट पर हुई यह दुर्घटना कोई पहली घटना नहीं है। सुल्तानगंज का यह क्षेत्र उत्तरवाहिनी गंगा के कारण विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन यहाँ के घाटों की बनावट काफी खतरनाक है। अक्सर देखा गया है कि स्नान के दौरान श्रद्धालुओं को गहराई का अंदाजा नहीं मिल पाता और वे हादसे का शिकार हो जाते हैं।

​स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन केवल सावन के महीने में ही यहाँ बैरिकेडिंग और सुरक्षा की व्यवस्था करता है, जबकि सालों भर यहाँ हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। अगर घाटों पर डेंजर जोन का संकेत होता या वहाँ सुरक्षा कर्मी (लाइफ गार्ड) तैनात होते, तो शायद आदर्श की जान बचाई जा सकती थी। रक्सौल से आए इन युवकों को यह पता नहीं था कि घाट के किस हिस्से में गहराई अधिक है। सुरक्षा के नाम पर केवल कुछ रस्सियां बांधी गई हैं, जो तेज बहाव में किसी काम की नहीं रह जातीं।

मातम में डूबा रक्सौल का टुमरिया टोला

​जैसे ही आदर्श के डूबने की खबर रक्सौल पहुँची, पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। रितेश ठाकुर के घर पर लोगों की भीड़ जमा हो गई है। आदर्श के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है; वे इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पा रहे हैं कि जो बेटा मैट्रिक की सफलता की खुशी मना रहा था, वह अब इस दुनिया में नहीं रहा।

​आदर्श के दोस्तों ने बताया कि वह पढ़ने में बहुत होनहार था और आगे चलकर इंजीनियर बनने का सपना देखता था। उसकी सादगी और मिलनसार स्वभाव के कारण वह सबका प्रिय था। आर्यन शर्मा और आर्यन कुमार, जो उसके साथ थे, वे अभी भी सदमे में हैं और बार-बार उस खौफनाक मंजर को याद कर सिहर उठते हैं। रक्सौल के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सर्च ऑपरेशन में तेजी लाई जाए और आदर्श के शव को जल्द से जल्द बरामद किया जाए ताकि परिजन उसका अंतिम संस्कार कर सकें।

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