मिशन मोड में काम: भागलपुर और खगड़िया को जोड़ने वाले पुल की साप्ताहिक होगी समीक्षा; मई 2026 तक एप्रोच रोड तैयार करने का लक्ष्य
वॉइस ऑफ बिहार (पटना)
भागलपुर और खगड़िया जिले की लाइफलाइन माने जाने वाले सुल्तानगंज-अगुवानी घाट गंगा पुल परियोजना को लेकर पथ निर्माण विभाग अब बेहद सख्त रुख में है। विभाग के सचिव श्री पंकज कुमार पाल ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्माण कार्य हर हाल में 18 महीने की निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि काम में देरी हुई, तो संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) करने की कार्रवाई की जाएगी।
साप्ताहिक मॉनिटरिंग और गुणवत्ता पर जोर
मंगलवार को विभागीय सभाकक्ष में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में सचिव ने परियोजना की बारीकियों की समीक्षा की। उन्होंने बिहार राज्य पुल निर्माण निगम को निर्देश दिया कि इस प्रोजेक्ट की साप्ताहिक समीक्षा (Weekly Review) की जाए। सचिव ने दो टूक शब्दों में कहा कि निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
डिजाइन और निर्माण की वर्तमान स्थिति
बैठक में पुल के तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा हुई:
- IIT Roorkee की सहमति: फाउंडेशन और सब-स्ट्रक्चर के डिजाइन पर IIT रुड़की ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है।
- कटिंग का काम जारी: पिलर संख्या P9 से P13 के बीच वेल कैप निर्माण के लिए पुराने वेल कैप (P10) की कटिंग की जा रही है। P11 और P12 की कटिंग की तैयारी भी अंतिम चरण में है।
- प्रस्ताव की समीक्षा: स्पैन P6 से P9 के बीच बचे हुए कार्यों के लिए संवेदक (Contractor) द्वारा दिए गए प्रस्ताव की समीक्षा प्राधिकरण अभियंता कर रहे हैं।
मई 2026 तक तैयार होगा एप्रोच रोड
परियोजना के तहत बनने वाले 20.3 किलोमीटर लंबे एप्रोच रोड (पहुँच पथ) को पूरा करने के लिए मई 2026 का लक्ष्य रखा गया है। सचिव ने निर्देश दिया कि ‘ROB पसराहा’ को छोड़कर शेष सभी हिस्सों में कार्य की गति बढ़ाई जाए और पर्याप्त संसाधनों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
क्यों खास है यह पुल?
यह पुल न केवल भागलपुर और खगड़िया को जोड़ेगा, बल्कि इससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच व्यापारिक और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को जबरदस्त रफ्तार मिलेगी। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी सुदृढ़ होने से लाखों लोगों का सफर आसान और कम समय वाला हो जाएगा।
बैठक में विभाग के वरीय पदाधिकारी, कंसल्टेंट और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि मौजूद थे। सचिव ने संवेदक से तत्काल ‘वर्क प्रोग्राम’ और ‘माइलस्टोन’ उपलब्ध कराने को कहा है ताकि काम की प्रगति को ट्रैक किया जा सके।


