भागलपुर, 8 अगस्त 2025 — बिहार के सुल्तानगंज गंगा घाट पर शुक्रवार तड़के हुई घटना ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। गंगा की तेज धार में दो महिलाएं बह गईं। इनमें से एक महिला का अब तक कोई पता नहीं चला, जबकि दूसरी महिला ने एक लाश को थामे हुए करीब 7 किलोमीटर तक बहकर अपनी जान बचाई।
स्नान के लिए गईं और शुरू हो गया मौत का सफर
सुबह करीब 4 बजे, सुल्तानगंज के नमामि गंगे घाट पर गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ थी। यहीं मुंगेर जिले के बरियारपुर के बंगाली टोला की रहने वाली कुमकुम देवी फूल बेचने का काम कर रही थीं। उसी दौरान एक अजनबी महिला कांवड़िया उनके पास आई और बोली — “गंगा स्नान करना चाहती हूँ, लेकिन अकेले डर लग रहा है।”
कुमकुम देवी ने मदद की नीयत से साथ चलने का फैसला किया। पर जैसे ही दोनों गंगा में उतरीं, उफनती लहरों ने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया। देखते ही देखते दोनों आंखों से ओझल हो गईं।
7 किलोमीटर तक लाश को पकड़कर बहती रही
तेज धारा में संघर्ष करती कुमकुम देवी ने हार मानने की बजाय एक अजीब फैसला लिया। उन्होंने बताया,
“मैं डूब रही थी, चिल्ला रही थी, कोई नहीं था। तभी मेरे पास एक महिला की लाश तैरकर आई। मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और बस उसी को थामे बहती रही। कभी पानी ऊपर करता, कभी नीचे… मुझे लगा अब बचना नामुमकिन है।”
गंगा की धारा उन्हें करीब 7 किलोमीटर दूर तिलकपुर गांव तक ले गई। यहां नाविक बंटी यादव और बलराम यादव ने बहती हुई महिला को देखा, और तुरंत नाव बढ़ाकर उसे खींचकर बाहर निकाला।
घरवालों ने मान लिया था कि अब वह नहीं रही
घटना की खबर कुमकुम देवी के परिजनों तक पहुंची, जिन्होंने उन्हें डूबने के बाद लापता मान लिया था। लेकिन जब वे जिंदा लौटीं, तो परिवार की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। गांव में यह दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं था।
दूसरी महिला की तलाश जारी
कुमकुम देवी के साथ गंगा में उतरी दूसरी महिला अब भी लापता है। उसकी पहचान नहीं हो पाई है, लेकिन बताया जा रहा है कि वह कांवड़ यात्रा पर आई थी।
सुल्तानगंज थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार के अनुसार,
“गोताखोरों की मदद से घटनास्थल से लेकर तिलकपुर तक के बीच गंगा में तलाश जारी है। शव मिलने के बाद ही आगे की पुष्टि हो सकेगी।”


