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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर बोले सुब्रमण्यम स्वामी, 1962 के दौर को भूल जाए चीन

 

चीन के साथ चल रहे विवाद को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में अपनी बात रखी। वहीं इस पर भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि रक्षा मंत्री ने बिलकुल ‘सटीक’ बातें रखी हैं। सरकार के इस रुख ने उनका संदेह दूर कर दिया। उन्होंने कहा कि चीन को अब 1962 वाली वैश्विक धारणा को भूल जाना चाहिए और उन्हें इस बात की पहचान कर लेनी चाहिए कि भारत में एक मजबूत ताकत के रूप में भाजपा-नेतृत्व वाली सरकार है। बता दें कि इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री ने भारत और चीन के बीच 5 बिंदुओं पर हुई सर्वसम्मति पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इसमें लद्दाख की ‘यथास्थिति’ को लेकर कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

वहीं 10 सितंबर को शंघाई सहयोग संगठन (SEO) की बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों नेता LAC पर बढ़े सीमा-तनाव को लेकर एक पांच बिंदुओं पर आधारित सर्वसम्मति पर पहुंचे थे।

इस सहमति पर बयान जारी करते हुए विदेश मंत्रालय ने पाया कि LAC पर चल रहा तनाव दोनों ही देशों के लिए फायदेमंद नहीं है। ‘लगातार बातचीत के माध्यम से जल्द से जल्द टकराव और तनाव को कम करना चाहिए एवं उचित दूरी को बनाए रखना चाहिए।’ जयशंकर और वांग वी ने इस मसले पर सहमति व्यक्त की कि दोनों ही पक्ष सीमा मामलों पर सभी मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल्स का पालन करेंगे। साथ ही अमन और शांति बनाए रखेंगे।

संसद में राजनाथ सिंह का बयान

मानसून सत्र के दूसरे दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में भारत-चीन सीमा को लेकर जारी गतिरोध पर बयान दिया। इस दौरान उन्होंने अप्रैल के बाद से पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध के हालात और सीमा पर शांति के लिए कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर किये गये प्रयासों का भी उल्लेख किया। साथ ही रक्षा मंत्री ने लद्दाख की पूर्वी सीमाओं पर हाल में हुई गतिविधियों से अवगत करवाया और भारतीय सैनिकों द्वारा दिए गए बलिदान के बारे में बात की। सिंह ने कहा इस सदन को प्रस्ताव पारित करना चाहिए कि यह सदन और सारा देश सशस्त्र बलों के साथ है जो देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए डटकर खडे़ हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने चीन को अवगत करा दिया कि सीमा पर यथास्थिति को जबरन बदलने का प्रयास अस्वीकार्य होगा। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार किया जा सकता है और सीमा मुद्दे पर बातचीत की जा सकती है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर किसी भी उल्लंघन वाली गतिविधि का द्विपक्षीय रिश्तों पर असर पड़ेगा।

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