‘रेड’ से पहले अब ‘SOP’ का कड़ा पहरा! STF जवान की शहादत के बाद जागे DGP; पुलिस पर हमले रोकने को नया ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार

HIGHLIGHTS: वर्दी पर ‘हमले’ बर्दाश्त नहीं; फील्ड में अब ‘एक्स्ट्रा’ अलर्ट

  • कड़ा आदेश: एसटीएफ जवान की मौत और पुलिस पर बढ़ते हमलों के बाद छापेमारी के लिए SOP का पालन अनिवार्य।
  • चेन ऑफ कमांड: अब किसी भी रेड से पहले सर्किल इंस्पेक्टर (CI) और SDPO को सूचना देना होगा जरूरी।
  • त्योहारी अलर्ट: चैत्र नवरात्र और ईद को लेकर बिहार पुलिस हाई-अलर्ट पर; असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर।
  • रिव्यू मीटिंग: मुजफ्फरपुर फायरिंग और पटना के बुद्धा कॉलोनी में पुलिस पर हुए हमलों की DGP ने की गहन समीक्षा।

छापेमारी का नया ‘सेफ्टी’ रिकॉर्ड: एक नजर में

नया नियम/प्रोटोकॉल

विवरण

अनिवार्य अधिकारी

SOP अनुपालन

छापेमारी के दौरान सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन।

थाना प्रभारी (SHO)

पूर्व सूचना

रेड से पहले वरीय अधिकारियों को ब्रीफिंग अनिवार्य।

CI और SDPO

स्पेशल टास्क

बालू माफिया और नारकोटिक्स सिंडिकेट के खिलाफ विशेष सतर्कता।

डीजी (अभियान)

त्योहार सुरक्षा

ईद और नवरात्र के दौरान सोशल मीडिया और जमीनी गश्त।

एडीजी (विधि-व्यवस्था)

पटना | 19 मार्च, 2026

​बिहार में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे सीधे कानून के रक्षकों पर हाथ डालने से नहीं हिचक रहे। हाल ही में एक मुठभेड़ में एसटीएफ (STF) के जवान की शहादत और मुजफ्फरपुर से लेकर पटना तक पुलिस टीमों पर हुए हमलों ने मुख्यालय को हिलाकर रख दिया है। बुधवार को डीजीपी विनय कुमार ने राज्य के सभी क्षेत्रीय पुलिस पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर स्पष्ट कर दिया कि अब ‘रेड’ का मतलब केवल अपराधी को पकड़ना नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

“बिना सूचना के नहीं होगी छापेमारी” — DGP

​डीजीपी ने छापेमारी की पुरानी परिपाटी को बदलते हुए नए निर्देश जारी किए हैं:

  1. तालमेल की कमी खत्म: अक्सर देखा गया है कि स्थानीय पुलिस बिना बैकअप या वरिष्ठों को बताए रेड पर निकल जाती है, जहाँ वे घिर जाते हैं। अब सीआई और एसडीपीओ को हर कदम की जानकारी देनी होगी।
  2. इन घटनाओं ने बढ़ाई चिंता: * पटना (बुद्धा कॉलोनी): नारकोटिक्स टीम पर हमला।
    • बिक्रम (रानीतालाब): अवैध बालू खनन रोकने गई टीम पर हमला।
    • मुजफ्फरपुर: पुलिस टीम पर हुई फायरिंग।
  3. त्योहारी शांति: ईद और नवरात्र के दौरान किसी भी तरह की सांप्रदायिक घटना या कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए एडीजी (विधि-व्यवस्था) पंकज दराद को विशेष मॉनिटरिंग का जिम्मा दिया गया है।

VOB का नजरिया: क्या ‘SOP’ अपराधियों के ‘खौफ’ को कम कर देगी?

​पुलिस मुख्यालय का यह फैसला स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल ‘सूचना’ देने से पुलिस सुरक्षित हो जाएगी? रानीतालाब और बुद्धा कॉलोनी जैसी घटनाएं बताती हैं कि अपराधी अब संगठित गिरोह की तरह पुलिस पर हमला करते हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि SOP के साथ-साथ जवानों को अत्याधुनिक बॉडी आर्मर और बॉडी-वर्न कैमरे देने की भी जरूरत है। जब अपराधी को पता होगा कि उसकी हर हरकत रिकॉर्ड हो रही है और पुलिस के पास भारी बैकअप है, तभी वर्दी का इकबाल बुलंद होगा। शहादत गर्व की बात है, लेकिन सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।

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