69वीं BPSC बैच पर सख्त कार्रवाई: 69 राजस्व अधिकारियों को बर्खास्तगी का नोटिस, 13 अप्रैल तक जवाब का अल्टीमेटम

पटना | बिहार में प्रशासनिक अनुशासन को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। 69वीं बीपीएससी (BPSC) बैच के 69 परीक्ष्यमान (प्रोबेशन) राजस्व अधिकारियों को सामूहिक अवकाश लेने और सरकारी कार्यों से अनुपस्थित रहने के आरोप में बर्खास्तगी का नोटिस जारी किया गया है। इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है।

सामूहिक अवकाश को बताया ‘अवैध’

द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि अधिकारियों द्वारा लिया गया सामूहिक अवकाश पूरी तरह अवैध है। विभाग ने उनकी अनुपस्थिति की अवधि को dies non घोषित कर दिया है, यानी यह समय उनकी सेवा अवधि में नहीं जोड़ा जाएगा।

आदेश के मुताबिक, चेतावनी के बावजूद कई अधिकारियों ने 25 मार्च 2026 तक अपने पदों पर योगदान नहीं दिया, जिसे सरकारी निर्देशों की अवहेलना और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन माना गया है।

24 जिलों में कार्रवाई, कई बड़े जिले शामिल

यह कार्रवाई राज्य के 24 जिलों में तैनात अधिकारियों पर की गई है। जिन जिलों में सबसे ज्यादा अधिकारी कार्रवाई की जद में आए हैं—

  • गया – 8 अधिकारी
  • रोहतास – 7 अधिकारी
  • मधुबनी – 5 अधिकारी

इसके अलावा बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, मधेपुरा, पूर्वी चंपारण, वैशाली और जमुई में 4-4 अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। वहीं सिवान, सीतामढ़ी और नालंदा में 3-3 अधिकारियों को नोटिस मिला है। पटना सहित अन्य जिलों के अधिकारी भी इस कार्रवाई में शामिल हैं।

13 अप्रैल तक जवाब, वरना होगी कड़ी कार्रवाई

सरकार ने सभी अधिकारियों को 13 अप्रैल 2026 तक स्पष्टीकरण देने का अंतिम मौका दिया है। साफ कहा गया है कि यदि तय समय सीमा तक जवाब नहीं मिला या संतोषजनक नहीं पाया गया, तो एकतरफा कार्रवाई करते हुए सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है।

प्रोबेशन में ही सख्ती, साफ संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब अनुशासनहीनता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे अधिकारी प्रोबेशन पीरियड में ही क्यों न हों।

प्रशासनिक सिस्टम में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति

इस कार्रवाई को राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार यह संदेश देना चाहती है कि सरकारी सेवा में नियमों और जिम्मेदारियों से समझौता नहीं किया जा सकता।

आगे क्या?

अब सभी की नजर 13 अप्रैल की समयसीमा पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी अपना पक्ष किस तरह रखते हैं और विभाग उनकी सफाई को स्वीकार करता है या नहीं।

अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो यह मामला बिहार के प्रशासनिक इतिहास में एक बड़ी और कड़ी कार्रवाई के रूप में दर्ज हो सकता है।

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