
तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे हैं। पार्टी में अंदरूनी कलह और राजनीतिक अस्थिरता के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर सियासी हलचल को और तेज कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद संगठनात्मक टूट की चर्चाएं पहले से ही चल रही थीं।
सुष्मिता देव का इस्तीफा, बीजेपी में जाने की अटकलें
सुष्मिता देव ने बुधवार को नई दिल्ली में अपना इस्तीफा सौंपते हुए तत्काल प्रभाव से इसे स्वीकार करने की मांग की। उन्होंने राज्यसभा सचिवालय और अधिकारियों का धन्यवाद भी किया। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वह जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो सकती हैं। उल्लेखनीय है कि टीएमसी में आने से पहले वह कांग्रेस की वरिष्ठ नेता थीं।
टीएमसी में इस्तीफों का सिलसिला तेज
इससे पहले 8 जून को राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने भी टीएमसी और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रदर्शन और 15 साल के शासन पर गंभीर सवाल उठाए थे।
लोकसभा में भी बगावत, 20 सांसदों के अलग होने की चर्चा
रिपोर्ट्स के मुताबिक टीएमसी के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने अलग गुट बनाकर लोकसभा स्पीकर से अलग बैठने की अनुमति मांगी है। काकोली घोष दस्तीदार सहित कई सांसदों ने संकेत दिया है कि यह समूह केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेगा। इससे एनडीए में शामिल होने की अटकलें और तेज हो गई हैं।
बागी गुट की गतिविधियां तेज
बागी सांसदों की मुलाकात केंद्रीय नेताओं और बीजेपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं से होने की भी चर्चा है। इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यह गुट भविष्य में एनडीए का हिस्सा बन सकता है। हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
संविधान और दल-बदल कानून का संदर्भ
संविधान के दसवें शेड्यूल (Anti-Defection Law) के अनुसार, किसी भी बगावत या पार्टी परिवर्तन से बचने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। इसी वजह से इस पूरे घटनाक्रम पर कानूनी नजर भी बनी हुई है।
टीएमसी बनाम विपक्षी गठबंधन की बढ़ती नजदीकियां
इसी बीच टीएमसी की शीर्ष नेतृत्व और कांग्रेस के बीच भी मुलाकातों का दौर जारी है। सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकातों के साथ-साथ राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की बैठकों ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है।
निष्कर्ष
टीएमसी इस समय अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकटों में से एक का सामना कर रही है। लगातार इस्तीफे, बगावत और संभावित गठबंधन बदलावों ने पार्टी की अंदरूनी एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह सिर्फ असंतोष है या किसी बड़े राजनीतिक पुनर्गठन की शुरुआत।


