भारत की जनगणना 2027 को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के उद्देश्य से पटना में राज्यस्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें राज्य के सभी प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य आगामी जनगणना प्रक्रिया की तैयारियों की समीक्षा करना और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देना था, ताकि आंकड़ों का संग्रहण पूरी तरह सटीक और पारदर्शी तरीके से किया जा सके।
मुख्य सचिव ने की अध्यक्षता
सम्मेलन की अध्यक्षता बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की। उन्होंने कहा कि जनगणना की सटीकता पर ही राज्य और देश की नीतियों का निर्माण निर्भर करता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, रोजगार और बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाएं जनगणना से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ही तैयार की जाती हैं।
उन्होंने कहा,
“यदि आंकड़ों में कोई भी त्रुटि होती है तो उसका सीधा असर नीति निर्माण और योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ता है। इसलिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि वे इस कार्य को पूरी गंभीरता से करें।”
17 अप्रैल से सेल्फ काउंटिंग की सुविधा
सम्मेलन में बताया गया कि 17 अप्रैल से नागरिकों के लिए सेल्फ काउंटिंग की सुविधा शुरू की जाएगी। इसके तहत लोग डिजिटल माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
इसके बाद 2 मई से प्रशिक्षित गणना कर्मी घर-घर जाकर जनगणना का कार्य शुरू करेंगे।
जनगणना में होंगे 33 प्रश्न
इस बार जनगणना में कुल 33 प्रश्न शामिल किए गए हैं। इनके माध्यम से परिवार की संरचना, आवासीय स्थिति, सामाजिक एवं आर्थिक पहलुओं से जुड़ी जानकारियां एकत्र की जाएंगी।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने जिलों में प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करें और समयबद्ध तरीके से सभी तैयारियां पूरी करें।
भविष्य की योजनाओं की नींव
मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि भविष्य की योजनाओं की नींव है। उन्होंने तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करने और डेटा एंट्री में किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचने का निर्देश दिया।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज नागरिकों की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखी जाएगी।
आम जनता को जागरूक करने पर जोर
सम्मेलन में जनजागरूकता पर भी विशेष बल दिया गया। जिला स्तर पर प्रचार-प्रसार अभियान चलाने का निर्देश दिया गया, ताकि लोग बिना किसी हिचक के सही जानकारी उपलब्ध करा सकें।
पंचायतों, नगर निकायों और स्थानीय संस्थाओं के सहयोग से लोगों को यह समझाया जाएगा कि जनगणना में दी गई जानकारी का उपयोग केवल विकासात्मक और नीतिगत उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा
प्रशिक्षण सम्मेलन में डिजिटल उपकरणों के उपयोग, प्रश्नावली भरने की प्रक्रिया और त्रुटियों से बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी गई। फील्ड स्तर पर आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प डेस्क और निगरानी व्यवस्था भी बनाई जाएगी।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि जनगणना 2027 की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से संपन्न हो। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी प्रतिबद्धता के साथ इस कार्य को सफल बनाएंगे।


