
पटना में भवन निर्माण विभाग के सचिव श्री कुमार रवि की अध्यक्षता में आयोजित राजस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्यभर में चल रही विभिन्न निर्माण परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिवेशन भवन में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, अभियंताओं और विभिन्न प्रशासी विभागों के नोडल पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और समयबद्ध तरीके से परियोजनाओं को पूरा करने की दिशा में आवश्यक निर्देश देना था।
बैठक के दौरान सचिव ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य में चल रही सभी निर्माण योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो योजनाएं पीछे चल रही हैं, उन्हें तेज गति से पूरा किया जाए और कार्यों में आ रही बाधाओं को तुरंत दूर किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि राज्य में कुल 2615 पंचायत सरकार भवनों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 600 से अधिक भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। इनमें से 284 भवनों को पंचायती राज विभाग को हस्तांतरित भी किया जा चुका है। सचिव ने निर्देश दिया कि शेष भवनों का निर्माण जल्द पूरा कर उन्हें भी विभाग को सौंपा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि हर महीने लक्ष्य निर्धारित कर कार्यों की प्रगति सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय भवनों के निर्माण कार्य की भी समीक्षा की गई। जानकारी दी गई कि राज्य के 240 प्रखंडों में कार्यालय भवनों का निर्माण किया जा रहा है, जबकि 59 प्रखंडों में कार्यालय के साथ आवासीय परिसर का निर्माण भी शामिल है। वर्तमान में 250 से अधिक भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। सचिव ने शेष भवनों के लिए निविदा प्रक्रिया को जल्द पूरा करने और कार्य प्रारंभ करने का निर्देश दिया।
सचिव ने निविदा और पुनर्निविदा प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी टेंडर प्रक्रियाएं पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी तरीके से निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी की जाएं। उन्होंने मुख्य अभियंताओं को नियमित मॉनिटरिंग करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में विभिन्न जिलों में निर्माणाधीन आवासीय भवनों, कोर्ट रूम और मंडल कारा के निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई। छपरा, दरभंगा, गया, जहानाबाद, कटिहार, खगड़िया और मधेपुरा सहित कई जिलों में चल रहे कार्यों को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया गया। साथ ही हैंडओवर की प्रक्रिया को भी समय पर पूरा करने पर जोर दिया गया।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के छात्रों के लिए बनाए जा रहे आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों के निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए सचिव ने इन परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों का समय पर निर्माण समाज के वंचित वर्गों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भागलपुर, सुपौल, वैशाली, सहरसा, किशनगंज और पटना सिटी सहित विभिन्न जिलों में स्थित अभियंत्रण महाविद्यालयों में अतिरिक्त भवनों—जैसे शैक्षणिक भवन, छात्रावास और ऑडिटोरियम—का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है। सचिव ने इन परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए ताकि छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
अटल कला भवन परियोजना की भी समीक्षा बैठक में की गई। बक्सर, सिवान, नवादा, कैमूर, शिवहर, अररिया, शेखपुरा, जमुई, औरंगाबाद, अरवल और नालंदा जिलों में निर्माणाधीन इन भवनों की क्षमता 620 लोगों की होगी। इसके अलावा लखीसराय में 630 क्षमता वाले ऑडिटोरियम का निर्माण अंतिम चरण में है, जिसे जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया।
सचिव ने मुख्य सचिवालय और विकास भवन में चल रहे अग्निशमन कार्यों को भी प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
बैठक के अंत में सचिव ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसी भी परियोजना में गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने अभियंताओं को नियमित रूप से स्थल निरीक्षण करने और संवेदकों के साथ साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण सामग्री मानक के अनुरूप होनी चाहिए और प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया गया कि वे PMIS पोर्टल पर सभी परियोजनाओं का डेटा समय-समय पर अपडेट करें, ताकि उच्च स्तर पर निगरानी की जा सके। सचिव ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर यह बैठक राज्य में निर्माण कार्यों को गति देने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।


