बिहार में जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला जारी: मोतिहारी में 10 की मौत, कई की हालत गंभीर

मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में जहरीली शराब कांड ने गंभीर रूप ले लिया है। बीते कुछ दिनों में इस घटना ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर 8 मौतों की पुष्टि की है। आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि कई पीड़ित अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

मौत का बढ़ता आंकड़ा और पहचान

जानकारी के अनुसार, मृतकों में चंदू कुमार, प्रमोद कुमार, परीक्षण मांझी, हीरालाल भगत, लालकिशोर राय, संपत साह और लड्डू साह जैसे नाम शामिल हैं। बाद में मोहम्मद इलियास अंसारी की मौत के साथ संख्या में इजाफा हुआ। वहीं, इलाज के दौरान लड्डू साह बालगंगा और जोधा मांझी ने भी दम तोड़ दिया, जिससे कुल मृतकों का आंकड़ा 10 तक पहुंच गया।

2 अप्रैल से शुरू हुआ मौत का सिलसिला

यह दर्दनाक घटना 2 अप्रैल से शुरू हुई, जब रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव में कई लोगों ने कथित रूप से जहरीली शराब का सेवन किया। इसके बाद अचानक तबीयत बिगड़ने लगी और लोगों को आनन-फानन में सदर अस्पताल पहुंचाया गया। शुरुआती दिन में ही दो लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद लगातार अगले दिनों में मौतों का सिलसिला जारी रहा।

अस्पताल में भर्ती, कई की हालत नाजुक

फिलहाल 15 से 20 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से कई की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग आधा दर्जन लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है। डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों की निगरानी कर रही है। लोहा ठाकुर, राहुल कुमार, रविंद्र यादव, दिनेश यादव और उमेश राम समेत कई मरीजों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

पुलिस का एक्शन, कई गिरफ्तार

घटना के बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गए हैं। जांच में सामने आया है कि यह पूरा मामला जहरीली शराब की आपूर्ति से जुड़ा है। पुलिस ने अब तक कन्हैया, राजा, खलीफा, सुनील साह, नागा राय, जम्मू बैठा और चौकीदार भरत राय को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये सभी अवैध शराब के कारोबार में शामिल थे और इलाके में इसकी सप्लाई कर रहे थे।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर बिहार में शराबबंदी कानून के बावजूद अवैध शराब के कारोबार पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब का धंधा चल रहा था, लेकिन इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

सरकार और प्रशासन की चुनौती

अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर पीड़ितों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करना, तो दूसरी ओर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना। साथ ही, यह भी जरूरी हो गया है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज के उस कड़वे सच को भी उजागर करती है, जहां जान जोखिम में डालकर लोग सस्ती शराब का सहारा लेने को मजबूर हैं।

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