NH-31पर रफ्तार ने ली मासूम समेत कइयों की जान; चीखों से दहला दयालपुर, भागलपुर से खगड़िया तक मातम

नवगछिया/भागलपुर | 25 फरवरी, 2026: एनएच-31 पर मंगलवार की शाम एक बार फिर साक्षात यमराज दौड़ रहे थे। झंडापुर थाना क्षेत्र के दयालपुर के पास एक बेकाबू बस ने ऐसी तबाही मचाई कि कई हंसते-खेलते परिवार पल भर में बिखर गए। रफ्तार का आलम यह था कि 80 की स्पीड में आ रही बस ने पहले एक टोटो को हवा में उड़ाया और फिर मजदूरों से भरी पिकअप वैन को रौंद डाला। इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि एनएच-31 अब सफर के लिए नहीं, बल्कि ‘सफेद कफन’ के लिए जाना जाने लगा है।

चश्मदीद की आपबीती: “आंखों के सामने छा गया अंधेरा”

​इस हादसे के गवाह और घायल मजदूर राहुल कुमार (समेली निवासी) ने उस खौफनाक मंजर को बयां किया। राहुल ने बताया कि वे 17 लोग पिकअप वैन में सवार होकर ईंट-भट्ठे से घर लौट रहे थे। शाम के करीब 5 बज रहे थे, तभी खगड़िया की ओर से एक बस काल बनकर आई। बस ने पहले एक सीएनजी टोटो को टक्कर मारी और फिर सीधे पिकअप से भिड़ गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पिकअप उछलकर दूर जा गिरी। राहुल कहते हैं, “चारों तरफ बस चीखें थी, लहूलुहान लोग थे और फिर मैं बेहोश हो गया।”

मातम की दो कहानियां: मासूम कुणाल और मजदूर अरविंद

​इस हादसे ने कई घरों के चिराग बुझा दिए:

  • कुणाल की आखिरी यात्रा: खगड़िया के माड़र गांव का मासूम कुणाल अपने माता-पिता के साथ ननिहाल (अंभो गांव) जा रहा था। किसी को नहीं पता था कि मां के ननिहाल पहुँचने से पहले ही कुणाल मौत की गोद में सो जाएगा।
  • सात साल का संघर्ष खत्म: कटिहार के समेली का अरविंद मंडल पिछले 7 साल से बिहपुर भट्ठे में मजदूरी कर रहा था। उसके दो छोटे बेटे रोहित और रंजीत अब भी पिता के लौटने का इंतजार कर रहे हैं, जिन्हें नहीं पता कि अब उनके सिर से पिता का साया उठ चुका है।

एक्शन में प्रशासन: आधी रात अस्पताल पहुँचे डीएम

​हादसे की खबर मिलते ही जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी और एसपी घटनास्थल पर पहुँचे। डीएम ने तुरंत मायागंज अस्पताल का रुख किया और इमरजेंसी वार्ड में भर्ती घायलों से मुलाकात की।

  • कड़ा निर्देश: डीएम ने अस्पताल अधीक्षक को आदेश दिया कि हर गंभीर घायल मरीज के पास एक समर्पित नर्स तैनात की जाए।
  • मुआवजा: सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की घोषणा की गई है।
  • सुरक्षा: मायागंज अस्पताल में भारी भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं।

सिर्फ इत्तेफाक नहीं, ये ‘डेथ ट्रैप’ है: पिछले 3 महीनों का खूनी रिकॉर्ड

​दयालपुर और नवगछिया का यह इलाका अब दुर्घटनाओं का हब बन चुका है। पिछले कुछ महीनों के आंकड़े डराने वाले हैं:

  1. 22 फरवरी 2026: मीरजाफरी में टोटो ने तीन भाई-बहनों को रौंदा, 2 साल की अलीना की मौत।
  2. 22 फरवरी 2026: दयालपुर में ही हाईवा की टक्कर से दो होनहार क्रिकेटरों (मनीष और विनीत) की मौत।
  3. 24 नवंबर 2025: एक ही दिन में दो शिक्षकों (सुशील और राजेश) की सड़क हादसे में जान गई।
  4. 22 नवंबर 2025: अलग-अलग हादसों में तीन लोगों (मनोज सिंह, विक्रांत और विपिन) की मौत।
  5. 30 नवंबर – 3 दिसंबर 2025: सविता देवी और जानू कुमार जैसे कई लोगों ने रफ़्तार के कारण अपनी जान गंवाई।

VOB का नजरिया: कब तक बहेगा सड़कों पर खून?

​एनएच-31 पर लगातार हो रही ये मौतें केवल ‘दुर्घटना’ नहीं हैं, बल्कि ये ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने और प्रशासन की ढीली पकड़ का नतीजा हैं। खगड़िया से भागलपुर के बीच चलने वाली बसें अक्सर रेस लगाती हैं, जिससे आम नागरिक अपनी जान गंवाते हैं। अगर अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो मुआवजे की राशि से किसी मासूम की जिंदगी वापस नहीं आएगी।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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