बांका: बिहार में सियासी हलचल के बीच मुख्यमंत्री की ‘समृद्धि यात्रा’ को लेकर अब बयानबाजी तेज हो गई है। बांका से जदयू सांसद ने कटोरिया में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी अनुपस्थिति पर खुलकर प्रतिक्रिया दी और साफ कहा कि उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित ही नहीं किया गया था।
“सम्मान से समझौता नहीं, बिना बुलाए जाना गलत”
कटोरिया स्थित एसपी यादव कॉलेज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सांसद गिरधारी यादव ने दो टूक कहा:
- “मुझे कार्यक्रम की कोई आधिकारिक सूचना या निमंत्रण नहीं मिला।”
- “बिना बुलाए किसी कार्यक्रम में जाना मेरे लिए उचित नहीं है।”
- “ऐसा करना न केवल मेरा, बल्कि बांका की जनता का भी अपमान होता।”
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बिना निमंत्रण शामिल होने से असहज स्थिति बन सकती थी, इसलिए उन्होंने दूरी बनाना ही बेहतर समझा।
पुराने विवादों का भी किया जिक्र
सांसद ने अपने फैसले के पीछे पुराने अनुभवों को भी वजह बताया। उन्होंने कहा कि पहले बौंसी मेले के दौरान जब वे संबोधन कर रहे थे, तब कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया था।
“ऐसी अप्रिय स्थिति दोबारा न बने, इस आशंका ने भी मुझे कार्यक्रम से दूर रहने के लिए प्रेरित किया,” उन्होंने कहा।
बेलहर विधायक मनोज यादव पर सीधा हमला
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गिरधारी यादव ने बेलहर के विधायक पर खुलकर निशाना साधा। उन्होंने कहा:
- “जो लोग आज पार्टी के अगुआ बनकर घूम रहे हैं, वही पहले पार्टी को कमजोर करने में लगे थे।”
- फ्लोर टेस्ट के दौरान विधायक के रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय वे गायब हो गए थे और सरकार को गिराने की कोशिश हुई थी।
सांसद ने यह भी कहा कि विधान परिषद चुनाव में पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर उम्मीदवार उतारना भी अनुशासनहीनता का उदाहरण है।
बेटे के चुनाव लड़ने पर दी सफाई
अपने बेटे के राजद (RJD) से चुनाव लड़ने की चर्चाओं पर सांसद ने स्पष्ट किया:
- “लोकतंत्र में हर व्यक्ति स्वतंत्र है।”
- “मेरा बेटा किस दल से चुनाव लड़ेगा, यह उसका निजी निर्णय है।”
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी अपने बेटे के लिए प्रचार नहीं किया और हमेशा जदयू व नीतीश कुमार के प्रति वफादार रहे हैं।
कार्यकर्ताओं का मिला समर्थन
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें पूर्व मुखिया नारायण यादव, सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव, राजीव चौधरी, सुरेंद्र यादव, चिरंजीव यादव, कमल यादव और रंजीत यादव समेत कई लोग शामिल थे। सभी ने सांसद के बयान का समर्थन किया और उनके साथ एकजुटता दिखाई।
जिले की राजनीति में बढ़ी हलचल
समृद्धि यात्रा जैसे बड़े कार्यक्रम से सांसद की दूरी और उसके बाद दिया गया बयान बांका की राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है। जदयू के अंदरूनी समीकरणों और स्थानीय नेतृत्व के बीच खींचतान अब खुलकर सामने आती दिख रही है।
निष्कर्ष
गिरधारी यादव का यह बयान न केवल व्यक्तिगत सम्मान का मुद्दा उठाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि जिले में राजनीतिक समन्वय की कमी है। आने वाले समय में यह विवाद किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।


