खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- बड़ा हमला: ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के लेख में सोनिया गांधी ने केंद्र की विदेश नीति को घेरा।
- आरोप: अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर नई दिल्ली की चुप्पी ‘मूक स्वीकृति’ के समान।
- टाइमिंग: इज़राइल दौरे से PM के लौटने के 48 घंटे के भीतर हुई खामेनेई की हत्या पर उठाए सवाल।
- इतिहास: अटल बिहारी वाजपेयी के ईरान दौरे और 1994 के कश्मीर मुद्दे का दिया हवाला।
- मांग: बजट सत्र के दूसरे हिस्से में विदेश नीति पर चर्चा की मांग।
नई दिल्ली: मध्य-पूर्व (Middle East) में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मचे वैश्विक हड़कंप के बीच अब भारत की आंतरिक राजनीति में भी उबाल आ गया है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक तीखे लेख के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर कड़े सवाल उठाए हैं। सोनिया गांधी ने खामेनेई की मौत पर सरकार की चुप्पी को भारत की ऐतिहासिक ‘गुटनिरपेक्ष’ (Non-Alignment) छवि के खिलाफ बताया है।
“चुप्पी तटस्थता नहीं, कर्तव्यहीनता है”: सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने अपने लेख (Op-ed) में स्पष्ट कहा कि किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष की इस तरह से ‘टारगेटेड किलिंग’ अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है।
- खामोशी पर सवाल: गांधी ने कहा कि नई दिल्ली की चुप्पी यह संकेत देती है कि भारत इस दुखद घटना को चुपचाप अपनी मंजूरी दे रहा है।
- नैतिक स्पष्टता की कमी: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल ईरान के जवाबी हमले की निंदा की, लेकिन उससे पहले हुए अमेरिका-इज़राइल के उकसावे वाले हमलों पर आंखें मूंद लीं।
PM के इज़राइल दौरे और हत्या की टाइमिंग पर शक
सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इज़राइल दौरे का जिक्र करते हुए टाइमिंग पर गंभीर सवाल खड़े किए:
- 48 घंटे का कनेक्शन: लेख के अनुसार, प्रधानमंत्री इज़राइल से बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को अपना समर्थन दोहराकर लौटे ही थे कि उसके 48 घंटे के भीतर खामेनेई की हत्या हो गई।
- दुनिया का गुस्सा: उन्होंने कहा कि जब गाजा की लड़ाई में आम लोगों की मौत को लेकर दुनिया भर में गुस्सा है, तब भारत का इज़राइल को ‘हाई-प्रोफाइल राजनीतिक समर्थन’ देना परेशान करने वाला बदलाव है।
अटल जी और 1994 की याद: “ईरान हमारा पुराना दोस्त”
कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार को इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि भारत की नीति हमेशा संप्रभु समानता पर आधारित रही है।
- अटल बिहारी वाजपेयी: उन्होंने 2001 में पूर्व पीएम अटल जी के ईरान दौरे का जिक्र किया।
- कश्मीर मुद्दा: सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि 1994 में जब पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर भारत को घेर रहा था, तब ईरान ने ही भारत का मजबूती से साथ दिया था।
ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ से कटा भारत?
सोनिया गांधी ने चिंता जताई कि जहाँ एक तरफ रूस, चीन और ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देश) के अन्य देश इस मुद्दे पर एक अलग रुख अपना रहे हैं, वहीं भारत अपने पुराने सहयोगियों से दूरी बना रहा है। उन्होंने मांग की है कि बजट सत्र के दूसरे हिस्से में सरकार को इस चुप्पी को तोड़ना चाहिए और संसद में विस्तृत चर्चा करनी चाहिए।
VOB का नजरिया: कूटनीति के चौराहे पर भारत
ईरान-इज़राइल विवाद में भारत का रुख हमेशा से संतुलित रहा है, लेकिन खामेनेई की मौत के बाद जिस तरह से सोनिया गांधी ने हमला बोला है, उसने सरकार को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश की है। 2026 का यह साल भारतीय विदेश नीति के लिए एक बड़ी परीक्षा है—क्या भारत अपने पुराने दोस्त ईरान और रणनीतिक साझेदार इज़राइल के बीच संतुलन बना पाएगा? या विपक्ष का यह दबाव सरकार को अपना रुख बदलने पर मजबूर करेगा?


