
नई दिल्ली: शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और छात्रों के हितों को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को लेकर नई शर्त सामने रखी है। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र सरकार आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक वह अनशन समाप्त करने पर विचार नहीं करेंगे।
जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को लिखा खुला पत्र
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के नाम एक खुला पत्र साझा किया। उन्होंने बताया कि दोनों मंत्री अस्पताल पहुंचकर उनसे मिले और स्वास्थ्य का हाल जानने के साथ अनशन समाप्त करने का आग्रह किया।
सरकार ने सकारात्मक रुख का दिया भरोसा
वांगचुक के अनुसार, मंत्रियों ने बातचीत के दौरान उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का भरोसा दिया। इनमें परीक्षा पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संसद में गंभीर चर्चा सुनिश्चित करने जैसे विषय शामिल हैं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर भी हुई चर्चा
वांगचुक ने अपने पत्र में बताया कि बातचीत के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। हालांकि उन्होंने इस विषय पर सरकार की ओर से किसी अंतिम निर्णय या आधिकारिक आश्वासन का उल्लेख नहीं किया।
‘चलो संसद’ मार्च को बताया शांतिपूर्ण
उन्होंने हाल में आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और युवाओं ने पूरे आंदोलन के दौरान संयम बनाए रखा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई उचित नहीं होगी।
‘युवाओं पर प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए’
सोनम वांगचुक ने सरकार से आग्रह किया कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा के खिलाफ बदले की भावना से कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई न की जाए। उनका कहना है कि इन युवाओं का उद्देश्य केवल पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग करना है।
65 सांसदों ने की अनशन समाप्त करने की अपील
वांगचुक ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया है। कई सांसद उनसे व्यक्तिगत रूप से भी मिले और उन्होंने आग्रह किया कि देश और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान आगे भी आवश्यक है।
‘व्यक्तिगत आग्रह नहीं, छात्रों का भविष्य पहले’
उन्होंने कहा कि वह केवल व्यक्तिगत अनुरोधों के आधार पर अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे। उनका कहना है कि वह अपने छात्रों के बीच लौटना और शिक्षा के क्षेत्र में काम जारी रखना चाहते हैं, लेकिन जिन छात्रों के भविष्य के लिए यह आंदोलन शुरू हुआ, उनके हितों से समझौता नहीं किया जा सकता।
लिखित आश्वासन मिलने पर करेंगे फैसला
सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार लिखित रूप से यह आश्वासन देती है कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो वह विश्वास के साथ अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।
‘लोकतंत्र की असली ताकत असहमति का सम्मान’
अपने पत्र के अंत में वांगचुक ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती इस बात से तय होती है कि वह असहमति रखने वाले नागरिकों, विशेषकर युवाओं, के साथ कैसा व्यवहार करता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं की चिंताओं को सुनना और उनका समाधान करना हर लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है।


