मोतिहारी/कल्याणपुर | 28 फरवरी, 2026: रिश्तों के कत्ल और लालच की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात में पूर्वी चंपारण की एक अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। पिता की पेंशन के पैसों के लिए उनकी सोते हुए हत्या करने वाले कलयुगी बेटे को कोर्ट ने ताउम्र जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। शुक्रवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) विद्या प्रसाद की अदालत ने आरोपी पुत्र को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत का फैसला: उम्रकैद और आर्थिक दंड
न्यायालय ने सत्रवाद संख्या 52/2024 की सुनवाई के दौरान आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी पाया:
- सजा: आरोपी ललन पंडित को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई गई है।
- जुर्माना: कोर्ट ने उस पर 20 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।
- अतिरिक्त सजा: यदि वह जुर्माना अदा नहीं करता है, तो उसे छह माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
- समायोजन: कारागार में उसके द्वारा पहले बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
वारदात की रात: छत के रास्ते घर में घुसा था ‘यमराज’
यह मामला जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के ध्रुव पकड़ी गांव का है। घटना 16 अगस्त 2023 की रात की है:
- हमला: जब लालजी पंडित अपनी पत्नी के साथ सो रहे थे, तभी उनका बेटा ललन पंडित छत के रास्ते घर में दाखिल हुआ।
- नृशंस हत्या: आरोपी ने सोए हुए पिता पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
- गवाह: अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक सुदामा बैठा ने सात गवाहों को पेश कर मामले को मजबूती से कोर्ट के सामने रखा।
मर्डर का मकसद: पेंशन की रकम पर थी नजर
पुलिस अनुसंधान और दर्ज प्राथमिकी (कांड संख्या 288/2023) के अनुसार, इस हत्या के पीछे केवल और केवल पैसों का लालच था:
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- दबाव: मृतक लालजी पंडित की पेंशन राशि को लेकर घर में काफी समय से तनाव चल रहा था।
- लालच: बेटा ललन पंडित लगातार अपने पिता पर दबाव बना रहा था कि वे अपनी पेंशन की रकम उसके नाम करा दें।
- FIR: मृतक की पत्नी महादेवी देवी ने अपने ही बेटे सहित तीन लोगों को इस मामले में नामजद किया था।
VOB का नजरिया: नैतिकता का पतन और न्याय की जीत
जिस पिता ने पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी की पेंशन के चंद रुपयों के लिए एक बेटे का ‘हथियारा’ बन जाना समाज के गिरते नैतिक मूल्यों का प्रमाण है। पूर्वी चंपारण की अदालत ने सात गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जो फैसला सुनाया है, वह ऐसे अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है। अपनी माँ की गवाही पर बेटे को मिली यह सजा न्याय की जीत है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


