HIGHLIGHTS
- दुखद वारदात: पंजाब एंड सिंध बैंक, बलराम नगर शाखा (लोनी) के मैनेजर अभिषेक शर्मा की गोली मारकर हत्या।
- सनकी गार्ड: छुट्टी के लिए फोन पर मिली डांट से गुस्साए गार्ड ने केबिन में घुसकर दागी गोली।
- बिहार का बेटा: मृतक अभिषेक (35 वर्ष) पटना के सालिमपुर (लखीपुर) के रहने वाले थे।
- गिरफ्तारी: सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी गार्ड और उसके साथी को पुलिस ने दबोचा।
गाजियाबाद/पटना | 17 मार्च, 2026
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ अनुशासन बनाए रखने की कीमत एक बैंक मैनेजर को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। पटना के रहने वाले 35 वर्षीय अभिषेक शर्मा, जो पंजाब एंड सिंध बैंक की लोनी स्थित बलराम नगर शाखा में प्रबंधक थे, उनकी उन्हीं के सुरक्षा गार्ड ने सरेआम हत्या कर दी।
डांट का खौफनाक बदला: “फोन पर शुरू हुआ विवाद, केबिन में खत्म हुई जिंदगी”
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना की जड़ एक मामूली डांट थी:
- विवाद की वजह: आरोपी गार्ड रविंद्र हुड्डा सोमवार को बिना बताए काम से गैरहाजिर था।
- मैनेजर का एक्शन: अभिषेक शर्मा ने उसे फोन कर छुट्टी लेने और अनुशासनहीनता के लिए कड़ी फटकार लगाई।
- दिनदहाड़े दरिंदगी: दोपहर करीब 12:30 बजे गार्ड रविंद्र अपने एक साथी के साथ बैंक पहुंचा। कहासुनी के बाद वह सीधे मैनेजर के केबिन में घुसा और अपनी लाइसेंसी बंदूक से अभिषेक के सीने में गोली मार दी।
सीसीटीवी में कैद हुआ गुनाह, 2 गिरफ्तार
गोली चलने से बैंक में भगदड़ मच गई। लहूलुहान अभिषेक को दिल्ली के जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
- पुलिस की कार्रवाई: डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में गार्ड के साथ एक और व्यक्ति दिखा, जिसने अपना चेहरा गमछे से ढक रखा था।
- सफलता: पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी गार्ड रविंद्र और उसके साथी को हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया है।
पटना में पसरा सन्नाटा: 2025 में ही संभाली थी कमान
अभिषेक शर्मा पटना के सालिमपुर थाना क्षेत्र के लखीपुर गांव के निवासी थे। वे अगस्त 2025 से इस शाखा में मैनेजर के रूप में तैनात थे और गाजियाबाद की ‘दिल्ली 99’ सोसाइटी में अपने परिवार के साथ रहते थे। उनकी मौत की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव में कोहराम मच गया है।
VOB का नजरिया: क्या काम की नैतिकता अब जानलेवा बन रही है?
अभिषेक शर्मा केवल अपना कर्तव्य निभा रहे थे। एक संस्थान के प्रमुख के रूप में अनुशासन सुनिश्चित करना उनका काम था, लेकिन एक सुरक्षा गार्ड द्वारा सरेआम ऐसी हैवानियत यह बताती है कि समाज में धैर्य और कानून का डर खत्म होता जा रहा है। जिस लाइसेंसी बंदूक का काम सुरक्षा करना था, उसे ‘रक्षक’ ने ही ‘भक्षक’ बनकर इस्तेमाल किया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है और उम्मीद करता है कि हत्यारे को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिलेगी।


