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तो क्या सुशील मोदी के इस बयान ने छीन ली उनकी डिप्टी CM की कुर्सी?

 

बिहार में नए डिप्टी सीएम के ऐलान के साथ ही अब यह साफ है कि बिहार प्रदेश में सत्ता की राजनीति से सुशील कमार मोदी अलग कर दिए गए हैं. भाजपा ने ये फैसला क्यों किया, इसको लेकर चर्चा व बहस जारी है. राजनीतिक जानकार इसके कई कारण गिना रहे हैं. हालांकि कुछ ऐसे भी हैं जो सुशील मोदी की सीएम नीतीश कुमार से अत्यधिक करीबी होने को भी इसका कारण मान रहे हैं. दूसरा भाजपा के इस फैसले को अब सुशील मोदी के उस बयान से भी जोड़कर देखा जा रहा है जो उन्होंने वर्ष 2012 में नीतीश कुमार को पीएम मटीरियल बताते हुए दिया था.दरअसल, वर्ष 2010 के बाद से ही नीतीश कैबिनेट में शामिल रहे तत्कालीन पशुपालन मंत्री गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव के लिए लगातार गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाने के पक्ष में माहौल बना रहे थे. उसी दौरान तीन सितंबर 2012 को एक अखबार को दिए इंटरव्यू में तत्कालीन डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने साफ तौर पर कहा कि नीतीश कुमार आगामी लोकसभा चुनाव में एक अहम भूमिका निभा सकते हैं.

नीतीश को बताया था PM मटीरियल

सुशील मोदी ने तब कहा था कि नीतीश में एक बेहतर प्रधानमंत्री बनने की सभी खूबियां हैं. सुशील मोदी ने एक तरह से नीतीश कुमार को नरेंद्र मोदी से बेहतर प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताया था. जाहिर है समय-समय पर नरेंद्र मोदी की खिलाफत करने वाले सुशील कुमार के इस बयान से एनडीए में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर सियासी पारा एक बार फिर गरम हो गया था.

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि तब भाजपा के कई नेताओं ने इसे पार्टी के खिलाफ की गई बयानबाजी बताया था. बीजेपी को बार-बार इस मुद्दे पर सफाई देनी पड़ी थी कि वह आगे क्या करेगी. कई शीर्ष नेताओं ने इसे भाजपा को बिहार में जदयू का छोटा भाई बनाए रखने की सुशील मोदी की कोशिश के तौर पर देखा था. हालांकि तब राजनीतिक परिस्थितियां अलग थीं, सो भाजपा ने इस मसले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था.

BJP के नेताओं को खटका था बयान

हालांकि भाजपा को कमतर आंकने की कीमत पर नीतीश कुमार से गहरा याराना, बीजेपी नेताओं को खटकता रहा था. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि सियासी हलकों में यह चर्चा आम थी कि सुशील मोदी ने बिहार में बीजेपी को नीतीश कुमार का पिछलग्गू बना दिया था. चर्चा यह भी चलती रहती थी कि जेडीयू नेताओं से ज्यादा नीतीश कुमार को सुशील मोदी डिफेंड करते हैं. ऐसे में भाजपा नेताओं की बनाई नीतियों से परे जब 2012 में सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार को पीएम मटीरियल बता दिया, तो यह बात शीर्ष नेताओं को और भी खटक गई थी.

नीतीश को इसलिए माननी पड़ी BJP की बात

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि कुछ महीनों को छोड़ दें तो बिहार में पिछले 15 सालों से बीजेपी सत्ता में  है, लेकिन वह नीतीश कुमार कुमार के साये से बाहर नहीं निकल पा रही थी. अब जबकि  इस बार के चुनाव में बीजेपी 74 सीटों के साथ जेडीयू से बड़ी पार्टी बन कर उभरी है तो शीर्ष नेतृत्व के पास मौका है. जानकार बताते हैं कि बदले दौर में भी नीतीश कुमार चाहते थे कि सुशील मोदी उनके साथ रहें, लेकिन बदली परिस्थितियों में वे भी अब पहले जैसे ताकतवर नहीं रहे जो वह सुशील मोदी को अपने साथ बनाए रखने के लिए जोर लगा सकें. अंतत: उन्होंने भी भाजपा नेताओं की बात मान ली.

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