बिहार में दवाओं के नाम पर ‘धीमा जहर’? पूर्व विधायक ललन पासवान ने खोला मोर्चा; राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर लगाई गुहार, पीआईएल की भी चेतावनी

समाचार के मुख्य बिंदु: स्वास्थ्य व्यवस्था की जड़ों पर प्रहार

  • गंभीर मुद्दा: बिहार में दवाओं के रखरखाव (Storage) में हो रही भारी लापरवाही पर पूर्व भाजपा विधायक ललन पासवान ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
  • मानकों का उल्लंघन: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दवाओं को 15°C से 25°C के नियंत्रित तापमान में रखना अनिवार्य है, लेकिन बिहार के सरकारी अस्पतालों और स्टोरों में इसका पालन नहीं हो रहा है।
  • खतरे में जान: तापमान नियंत्रण और लॉग बुक की व्यवस्था न होने से दवाएं बेअसर या जहरीली हो सकती हैं, जो मरीजों के लिए जानलेवा है।
  • बड़ा कदम: ललन पासवान ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री, राज्यपाल, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
  • कानूनी अल्टीमेटम: सुधार न होने पर हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की चेतावनी दी गई है।
  • VOB इनसाइट: यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि ‘मेडिकल एथिक्स’ और मानवाधिकारों से जुड़ा है; बिना कोल्ड चेन वाली दवाएं अक्सर अपना रासायनिक संतुलन खो देती हैं।

भागलपुर | 27 मार्च, 2026

​बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है, और इस बार मुद्दा ‘दवाओं की उपलब्धता’ नहीं बल्कि उनकी ‘गुणवत्ता’ है। पीरपैंती (भागलपुर) के पूर्व भाजपा विधायक ललन पासवान ने एक ऐसी सच्चाई उजागर की है, जो सीधे तौर पर आम जनता के जीवन को प्रभावित करती है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में दवाओं के भंडारण के लिए निर्धारित अंतरराष्ट्रीय मानकों (Cold Chain) की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिसे ललन पासवान ने “जनता की जान से सीधा खिलवाड़” करार दिया है।

WHO के मानक बनाम बिहार की हकीकत

​ललन पासवान ने तकनीकी तथ्यों के साथ अपनी बात रखते हुए बताया कि दवाओं का असर उनके सुरक्षित रखरखाव पर निर्भर करता है।

तापमान का गणित और दवाओं की गुणवत्ता:

विवरण

मानक (WHO Guidelines)

बिहार की वर्तमान स्थिति (दावा)

सामान्य दवाओं का तापमान

15°C से 25°C (अधिकतम 30°C)

खुले वातावरण और अत्यधिक गर्मी में भंडारण

मॉनिटरिंग व्यवस्था

डिजिटल लॉग बुक और निरंतर निगरानी

लॉग बुक और तापमान मॉनिटरिंग का अभाव

दवाओं की स्थिति

रासायनिक रूप से स्थिर और प्रभावी

तापमान बिगड़ने से गुणवत्ता में भारी गिरावट

ललन पासवान का कहना है कि जब दवाओं को नियंत्रित वातावरण में नहीं रखा जाता, तो वे अपना प्रभाव खो देती हैं। ऐसी दवाओं का सेवन करने से मरीजों को लाभ होने के बजाय गंभीर दुष्परिणाम (Side Effects) भुगतने पड़ सकते हैं।

विधानसभा से दिल्ली दरबार तक की लड़ाई

​यह पहली बार नहीं है जब ललन पासवान ने इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में भी वे बिहार विधानसभा के पटल पर इस विषय को प्रमुखता से रख चुके हैं। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस ठोस कार्रवाई न होने के बाद अब उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का फैसला किया है।

  1. शीर्ष नेतृत्व को पत्र: उन्होंने देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को औपचारिक पत्र भेजकर बिहार के ड्रग स्टोरेज सिस्टम की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
  2. न्यायपालिका का रुख: पूर्व विधायक ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अस्पतालों और ड्रग वेयरहाउसों में एयर कंडीशनिंग (AC) और लॉग बुक की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे जनता के हित में उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

ललन पासवान का कड़ा बयान

​पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त की और कहा:

​”यह केवल व्यवस्था की सुस्ती नहीं है, बल्कि एक अपराधी लापरवाही है। गरीब आदमी सरकारी अस्पताल में उम्मीद लेकर जाता है, लेकिन वहां उसे ऐसी दवाएं दी जा रही हैं जिनका असर खत्म हो चुका है। सरकार को तुरंत तापमान नियंत्रण प्रणाली लागू करनी चाहिए।”

VOB का नजरिया: क्या दवाओं का ‘एक्सपायरी डेट’ ही काफी है?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि दवाओं की गुणवत्ता केवल उनकी निर्माण तिथि (Manufacturing Date) से तय नहीं होती।

  • अदृश्य खतरा: एक दवा जिसकी एक्सपायरी अभी 1 साल बची है, अगर उसे 40°C की गर्मी में रखा जाए, तो वह अपनी शक्ति खो देती है। आम मरीज इसे पहचान नहीं सकता।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: बिहार के कई पीएचसी और सब-सेंटरों में बिजली की अनियमित आपूर्ति और एसी (AC) की कमी कोल्ड चेन को बनाए रखने में सबसे बड़ी बाधा है।
  • जवाबदेही: क्या स्वास्थ्य विभाग के पास कोई ऐसा सिस्टम है जो नियमित रूप से स्टोरों के तापमान का ऑडिट करे? ललन पासवान का यह सवाल विभाग की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।

सुशासन और स्वास्थ्य सुरक्षा की अग्निपरीक्षा

​पूर्व विधायक ललन पासवान का यह हस्तक्षेप बिहार के स्वास्थ्य विभाग के लिए एक वेक-अप कॉल है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय और केंद्र सरकार इस पर क्या संज्ञान लेती है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इस मुद्दे पर स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया, दवाओं के सैंपल की लैब रिपोर्ट और ललन पासवान द्वारा दायर की जाने वाली संभावित पीआईएल की हर ताज़ा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।

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