सिवान का ‘कबाड़ मंडी’ मॉडल बना मिसाल: कचरे से कमाई और रोजगार का नया रास्ता

पटना, 27 मार्च 2026। बिहार के सिवान जिले से एक ऐसी पहल सामने आई है, जिसने “कचरा” शब्द की परिभाषा ही बदल दी है। यहां शुरू हुआ ग्रामीण भारत का अनोखा स्टार्टअप ‘कबाड़ मंडी’ अब लोगों के लिए आय का जरिया बन चुका है। यह पहल न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है, बल्कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा योगदान दे रही है।

इस स्टार्टअप की शुरुआत नौतन प्रखंड के खलवां ग्राम पंचायत के मुखिया अमित सिंह ने की। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए गांव-गांव में फैले कचरे को संसाधन में बदलने का काम शुरू किया। यह स्टार्टअप ‘असराज स्क्रैप सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम से पंजीकृत है और महज 18 महीनों में पूरे सिवान जिले में अपनी पहचान बना चुका है। अब इसका विस्तार गोपालगंज जिले तक किया जा रहा है।

ऐप के जरिए घर-घर से कचरा संग्रह, तुरंत भुगतान

‘कबाड़ मंडी’ का सबसे खास पहलू इसका डिजिटल मॉडल है। गांव के लोग मोबाइल ऐप के माध्यम से अपने घर के रिसाइकल योग्य कचरे—जैसे प्लास्टिक बोतल, रैपर, टीन आदि—की जानकारी दर्ज करते हैं। इसके बाद टीम तय समय पर घर पहुंचकर कचरे का वजन करती है और मौके पर ही भुगतान कर देती है।

वर्तमान दरों के अनुसार प्लास्टिक बोतल 15 रुपये प्रति किलो, काला प्लास्टिक 2 रुपये, सफेद मिक्स प्लास्टिक 5 रुपये और टीन 10 रुपये प्रति किलो खरीदा जा रहा है। इससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का एक नया स्रोत मिला है।

कचरे से बन रहे उपयोगी उत्पाद

संग्रहित कचरे को पंचायत स्तर पर स्थापित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट (PWMU) और वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट (WPU) में प्रोसेस किया जाता है। रिसाइकलिंग के बाद इससे कई उपयोगी उत्पाद बनाए जा रहे हैं।

योजना के तहत:

  • 40 किलो प्लास्टिक से 3 फीट का वॉश बेसिन
  • 75 किलो से पार्क बेंच
  • 35 किलो से डस्टबिन
  • इसके अलावा फेंस, स्कूल बेंच, फ्लावर पॉट, अलमारी और पोर्टेबल टॉयलेट भी तैयार किए जा रहे हैं

इन उत्पादों की खासियत यह है कि इनकी उम्र लगभग 15 साल तक होती है।

हर महीने सवा टन कचरे का उठाव, 22 लोगों को रोजगार

इस पहल के तहत फिलहाल सिवान जिले में हर महीने करीब सवा टन रिसाइकल योग्य कचरे का संग्रह किया जा रहा है। इस स्टार्टअप से 22 लोगों को सीधा रोजगार मिला है, जिन्हें 12 हजार रुपये से अधिक वेतन, मेडिकल सुविधा और 7 लाख रुपये तक का बीमा कवर भी दिया जा रहा है।

इसके साथ ही पंचायत क्षेत्र अब खुले में कचरा फेंकने से लगभग मुक्त हो चुका है और जैविक कचरे से खाद बनाने का काम भी शुरू हो गया है।

देशभर में हो रहा विस्तार, बड़े संगठनों से जुड़ाव

‘कबाड़ मंडी’ ने हरिद्वार, पंजाब और बनारस स्थित कोका-कोला यूनिट जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी की है, जहां रिसाइकल प्लास्टिक की सप्लाई की जा रही है। इसके अलावा शादी-विवाह जैसे आयोजनों में निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को भी प्रोसेस किया जा रहा है।

भविष्य में इस प्लास्टिक कचरे का उपयोग सड़क निर्माण में भी किया जाएगा, जिससे न केवल पर्यावरण को लाभ होगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

ग्रामीण भारत के लिए बन रहा मॉडल

‘कबाड़ मंडी’ अब सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं, बल्कि एक सफल मॉडल बन चुका है, जिसे देश के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है। यह पहल दिखाती है कि सही सोच और तकनीक के उपयोग से कचरा भी कमाई और विकास का मजबूत आधार बन सकता है।

इस तरह सिवान का यह प्रयोग न सिर्फ बिहार, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन रहा है।

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