सीवान में ‘ऑर्केस्ट्रा’ के नाम पर दरिंदगी का अंत: पुलिस ने 5 नाबालिग लड़कियों को कराया मुक्त; बंगाल से नागालैंड तक फैला था शोषण का जाल

सीवान | 01 मार्च, 2026: बिहार के सीवान जिले में ‘मनोरंजन’ के नाम पर चल रहे शोषण के एक बड़े रैकेट का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR), नई दिल्ली के कड़े रुख के बाद सीवान पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जी.बी. नगर थाना क्षेत्र से पांच नाबालिग लड़कियों को ऑर्केस्ट्रा संचालकों के चंगुल से सुरक्षित मुक्त कराया है।

दिल्ली से आए आदेश पर सीवान पुलिस का ‘एक्शन’

​यह पूरी कार्रवाई नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पत्र के आलोक में की गई। सीवान के पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) के नेतृत्व में महिला थाना की एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने जी.बी. नगर थाना क्षेत्र के संदिग्ध ऑर्केस्ट्रा स्थलों की विधिवत घेराबंदी कर छापेमारी की, जिससे संचालकों में हड़कंप मच गया।

नागालैंड और बंगाल की बेटियां भी थीं कैद: जबरन कराया जा रहा था डांस

​पुलिस द्वारा मुक्त कराई गई पांचों लड़कियां नाबालिग हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस रैकेट के तार अंतरराज्यीय मानव तस्करी से जुड़े प्रतीत होते हैं। मुक्त कराई गई लड़कियों का विवरण इस प्रकार है:

  • पश्चिम बंगाल: 02 लड़कियां।
  • बिहार: 02 लड़कियां।
  • नागालैंड: 01 लड़की।

​शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इन मासूमों को न केवल बंधक बनाकर रखा गया था, बल्कि उन्हें जबरन प्रताड़ित कर ऑर्केस्ट्रा में नृत्य करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि नागालैंड और बंगाल जैसे दूर-दराज के इलाकों से इन लड़कियों को बिहार के सुदूर अंचलों तक कैसे लाया गया।

VOB का नजरिया: ऑर्केस्ट्रा की आड़ में ‘मॉडर्न गुलामी’

​सीवान की यह घटना एक बार फिर उजागर करती है कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में चलने वाले ऑर्केस्ट्रा अक्सर ‘मॉडर्न गुलामी’ के अड्डे बन चुके हैं। नागालैंड जैसी जगह से एक नाबालिग लड़की का सीवान के ऑर्केस्ट्रा में मिलना एक बहुत बड़े और संगठित ‘ह्यूमन ट्रैफिकिंग’ नेटवर्क की ओर इशारा करता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ मांग करता है कि केवल लड़कियों को मुक्त कराना काफी नहीं है, बल्कि उन ‘सफेदपोश’ लोगों को भी बेनकाब किया जाए जो इन ऑर्केस्ट्रा संचालकों को संरक्षण देते हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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