​सीवान में 40 लाख की सोना लूट के आरोपी का एनकाउंटर: पुलिस की जवाबी फायरिंग में बदमाश के दोनों घुटनों में लगी गोली, गंभीर हालत में पटना रेफर

सीवान, 18 मई 2026। बिहार के सीवान जिले में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और बड़े आपराधिक सिंडिकेट के खिलाफ जारी प्रशासनिक अभियान के तहत देर रात एक बड़ी और सनसनीखेज पुलिस मुठभेड़ दर्ज की गई है। जिला पुलिस की विशेष जांच टीम ने चर्चित जीरादेई थाना क्षेत्र के जामापुर आभूषण दुकान लूटकांड के मुख्य आरोपियों में से एक को एक कड़े विधिक मुकाबले के बाद मार गिराने के बजाय आत्मरक्षार्थ की गई फायरिंग में गंभीर रूप से घायल कर दिया है। पुलिस मुठभेड़ में घायल हुए इस शातिर अपराधी की पहचान सिसवन थाना क्षेत्र के चांदपुर (घुरघाट) निवासी श्रीनिवास सिंह के पुत्र अंकित कुमार सिंह के रूप में स्थापित की गई है।

​देर रात हुई इस आमने-सामने की खूनी भिड़ंत के दौरान अपराधी द्वारा पुलिस बल पर किए गए जानलेवा हमले के जवाब में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया, जिसमें आरोपी के दोनों घुटनों में गोलियां लगी हैं। घायल अवस्था में अंकित कुमार सिंह को तुरंत प्राथमिक सुरक्षा घेरे के बीच सीवान सदर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार और घावों की विधिक जांच के बाद उसकी अत्यंत नाजुक और चिंताजनक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बेहतर न्यूरो और सर्जिकल प्रबंधन के लिए उसे पटना उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए रेफर कर दिया है। इस घटना के बाद संपूर्ण सीवान जिले और विशेष रूप से सिसवन प्रक्षेत्र में सुरक्षा प्रणालियों को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है।

जामापुर आभूषण दुकान लूटकांड का आपराधिक इतिहास और खौफ का मंजर

​इस पूरे पुलिस एनकाउंटर की कड़ियां बीते 6 मई 2026 को घटित हुई एक बेहद दुस्साहसिक और बड़ी दस्युता (लूट) की वारदात से विधिक रूप से जुड़ी हुई हैं। सीवान जिले के जीरादेई थाना प्रक्षेत्र अंतर्गत आने वाले जामापुर बाजार स्थित एक प्रतिष्ठित आभूषण प्रतिष्ठान में हथियारबंद अपराधियों ने दिन-दहाड़े धावा बोला था। अपराधियों ने दुकान के मालिकों और वहां मौजूद ग्राहकों को पिस्तौल की नोक पर बंधक बना लिया था और महज कुछ ही मिनटों के भीतर दुकान के लॉकर और काउंटरों में रखे लगभग 40 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के कीमती आभूषण और नकद राशि लूटकर पूरी कड़ाई के साथ फरार हो गए थे।

​इस भीषण डकैती के बाद सीवान के संपूर्ण व्यावसायिक वर्ग और स्वर्णकारों के बीच गहरे खौफ और असुरक्षा का माहौल व्याप्त हो गया था। स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी और लूटे गए सोने की शत-प्रतिशत बरामदगी की विधिक मांग उठाई थी। घटना की गंभीरता और भारी वित्तीय गबन को देखते हुए जिला मुख्यालय ने इस कांड के उद्भेदन को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया था।

पुलिस अधीक्षक पूरण कुमार झा का एक्शन प्लान और चार विशेष टीमों का गठन

​40 लाख रुपये के इस हाई-प्रोफाइल लूटकांड के तुरंत बाद सीवान के पुलिस अधीक्षक पूरण कुमार झा ने मामले की कमान अपने हाथों में ले ली थी। पुलिस अधीक्षक पूरण कुमार झा के विधिक निर्देश पर जिले के सबसे अनुभवी और तकनीकी रूप से दक्ष पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए चार विशेष जांच टीमों (SIT) का गठन किया गया था। इन टीमों को अलग-अलग प्रक्षेत्रों में अपराधियों के तकनीकी सर्विलांस, मोबाइल टावर डंप डेटा के विश्लेषण और मानवीय खुफिया तंत्र को सक्रिय करने का जिम्मा सौंपा गया था।

​पुलिस की इन विशेष टीमों ने शुरुआती दौर में कतिपय संदेहास्पद ठिकानों पर दबिश देकर इस गिरोह के कुछ जमीनी मददगारों और अपराधियों को विधिक रूप से दबोचने में सफलता पाई थी। हिरासत में लिए गए उन अपराधियों से जब पुलिस की अनुसंधान विंग ने बंद कमरे में कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने जामापुर लूटकांड की पूरी साजिश का विलेख खोलकर रख दिया। पकड़े गए अपराधियों के स्वीकारोक्ति बयान और उनके मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) के सांगठनिक मिलान से ही यह प्रामाणिक सुराग मिला कि लूट की मुख्य खेप और हथियारों के साथ गैंग का मुख्य शूटर अंकित कुमार सिंह सिसवन प्रक्षेत्र के किसी गुप्त ठिकाने पर छिपकर अपनी विधा बदल रहा है।

आधी रात को गोलियों की गूंज: मुठभेड़ और आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई

​पुलिस सूत्रों से मिली छनकर आ रही कड़ियों के अनुसार, रविवार और सोमवार की मध्यरात्रि के समय जब विशेष जांच टीम को अंकित कुमार सिंह की सटीक भौगोलिक अवस्थिति (लोकेशन) का पता चला, तो पुलिस बल ने उस चिन्हित इलाके की चौतरफा वैधानिक घेराबंदी शुरू कर दी। खुद को पुलिस के सघन चक्रव्यूह में पूरी तरह घिरा हुआ पाकर और भागने के सारे रास्ते बंद देखकर अपराधी अंकित कुमार सिंह ने आत्मसमर्पण करने के बजाय अपने पास मौजूद अवैध अत्याधुनिक हथियार से पुलिस टीम पर सीधे जानलेवा फायरिंग झोंक दी।

​अपराधी द्वारा अचानक की गई इस फायरिंग से पुलिस कर्मियों की जान पर बन आई। पुलिस बल के जवानों ने तुरंत अपनी सुरक्षात्मक पोजीशन ली और कानून द्वारा प्रदत्त आत्मरक्षार्थ (Self-Defense) के विधिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए अपराधियों पर नियंत्रित विधा में जवाबी फायरिंग शुरू की। दोनों तरफ से कई राउंड गोलियां चलने के बाद पुलिस की सटीक गोलीबारी के कारण अंकित कुमार सिंह के दोनों घुटनों में गोलियां लगीं और वह जमीन पर गिर पड़ा, जिसके बाद पुलिस ने उसे अपनी विधिक अभिरक्षा में ले लिया।

चिकित्सीय बुलेटिन और प्रशासनिक स्तर पर कड़ी गोपनीयता का पहरा

​मुठभेड़ के तुरंत बाद खून से लथपथ पड़े अंकित कुमार सिंह को पुलिस सुरक्षा वाहनों के माध्यम से अविलंब सीवान सदर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में लेकर पहुंची। अस्पताल के ड्यूटी पर तैनात मुख्य चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि गोली अपराधी के घुटनों के आर-पार हो चुकी है, जिसके कारण अत्यधिक मात्रा में रक्तस्राव हुआ है। प्राथमिक उपचार के माध्यम से खून के बहाव को रोकने का विधिक प्रयास किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, वर्तमान समय में उसकी शारीरिक स्थिति स्थिर बनी हुई है, लेकिन हड्डियों और नसों की गहरी क्षति को देखते हुए तथा किसी भी आंतरिक विसंगति से बचने के लिए उसे बेहतर इलाज हेतु पटना रेफर किया गया है।

​दूसरी ओर, इस पूरे एनकाउंटर को लेकर सीवान पुलिस के आला अधिकारी वर्तमान समय में अत्यधिक सतर्कता और प्रशासनिक गोपनीयता का पहरा बनाए हुए हैं। पुलिस के वरिष्ठ विभाव फिलहाल आधिकारिक रूप से कैमरे के सामने खुलकर कुछ भी बोलने से पूरी तरह बच रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने मुठभेड़ की सटीक और वास्तविक भौगोलिक जगह का खुलासा करने से भी विधिक रूप से इनकार कर दिया है ताकि मामले के अन्य फरार सह-अभियुक्तों को सचेत होने का अवसर न मिल सके। अस्पताल परिसर के भीतर भी जब मीडिया कर्मियों ने घायल अपराधी से बातचीत करने या उसका बयान लेने का प्रयास किया, तो वहां तैनात सुरक्षा बलों ने विधिक कारणों का हवाला देते हुए उसे पूरी तरह से रोक दिया। पुलिस का कहना है कि इस मामले में साक्ष्यों के संकलन और जब्ती सूची की प्रविष्टि पूरी होने के बाद ही विस्तृत विधिक विवरणी आधिकारिक प्रेस नोट के माध्यम से साझा की जाएगी।

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