मुजफ्फरपुर में शराब माफिया का खौफनाक दुस्साहस! उत्पाद पुलिस को कार से कुचलने की कोशिश; ट्रेन से आई थी विदेशी शराब की बड़ी खेप, जंक्शन पर मची अफरा-तफरी

समाचार के मुख्य बिंदु: जंक्शन से कार तक… तस्करी और मौत के खेल की पूरी कहानी

  • बड़ी वारदात: मुजफ्फरपुर जंक्शन पर ट्रेन के जरिए मंगवाई गई विदेशी शराब की खेप उतारकर भाग रहे तस्करों ने पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने का प्रयास किया।
  • जान बचाने की जद्दोजहद: घेराबंदी कर रही उत्पाद विभाग की टीम को तस्करों ने अपनी तेज रफ्तार कार से कुचलने की कोशिश की, जिससे कई पुलिसकर्मी बाल-बाल बचे।
  • ट्रेन बना जरिया: शराब माफिया अब सड़क मार्ग के बजाय रेलवे पार्सल और बुकिंग का सहारा ले रहे हैं, ताकि पुलिस की नजरों से बच सकें।
  • फरारी और बरामदगी: पुलिस के बढ़ते दबाव को देख तस्कर शराब से लदी कार को सड़क पर ही छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।
  • VOB इनसाइट: मुजफ्फरपुर जंक्शन जैसे व्यस्ततम स्टेशन से सुबह-सवेरे शराब की खेप का निकल जाना रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेल पुलिस (GRP) की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। शराबबंदी वाले बिहार में माफिया अब इतने बेखौफ हो चुके हैं कि वे वर्दीधारियों को जान से मारने की कोशिश करने से भी नहीं हिचक रहे हैं।

मुजफ्फरपुर | 29 मार्च, 2026

​बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में शराब माफिया और पुलिस के बीच लुका-छिपी का खेल अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। रविवार की अहले सुबह मुजफ्फरपुर जंक्शन के पास जो कुछ भी हुआ, उसने प्रशासन के कान खड़े कर दिए हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, शराब के धंधेबाजों ने न केवल कानून की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि मौके पर तैनात उत्पाद पुलिस के जवानों को अपनी गाड़ी के टायर के नीचे रौंदने का प्रयास किया। यह घटना मुजफ्फरपुर में बढ़ते संगठित अपराध और शराब सिंडिकेट की गहरी पैठ को उजागर करती है।

ट्रेन की बुकिंग और ‘अर्ली मॉर्निंग’ ऑपरेशन: माफिया का नया मास्टरप्लान

​मुजफ्फरपुर में शराब की तस्करी के लिए अब पारंपरिक रास्तों को छोड़कर नए और सुरक्षित तरीके अपनाए जा रहे हैं। पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, विदेशी शराब की यह बड़ी खेप किसी एक्सप्रेस ट्रेन के जरिए बुक कराकर मुजफ्फरपुर जंक्शन लाई गई थी। तस्करों ने जानबूझकर ‘अहले सुबह’ (भोर) का समय चुना, क्योंकि इस वक्त स्टेशन और आसपास के इलाकों में सुरक्षा जांच और गश्त आमतौर पर ढीली होती है।

​जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर रुकी, तस्करों के गुर्गों ने तेजी से शराब के कार्टन उतारे और स्टेशन के बाहर पहले से खड़ी एक लग्जरी कार में लोड करना शुरू कर दिया। माफिया का यह आत्मविश्वास बताता है कि उनके पास स्टेशन के भीतर और बाहर की हर गतिविधि की सटीक जानकारी थी।

एनकाउंटर और जानलेवा हमला: जब पुलिस के सामने आई मौत की रफ्तार

​उत्पाद पुलिस (Excise Department) की टीम को इस खेप के बारे में गुप्त सूचना मिल चुकी थी। जैसे ही तस्करों ने कार स्टार्ट की और जंक्शन से बाहर निकलने की कोशिश की, पहले से घात लगाकर बैठी उत्पाद विभाग की टीम ने कार को चारों तरफ से घेरने का प्रयास किया। पुलिस कर्मियों ने कार को रुकने का इशारा किया, लेकिन कानून का सम्मान करने के बजाय तस्करों ने गाड़ी की रफ्तार और बढ़ा दी।

कुचलने का प्रयास:

प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस टीम के सदस्यों के अनुसार, तस्करों ने सीधे पुलिसकर्मियों की दिशा में कार मोड़ दी। उनका इरादा साफ था—या तो रास्ता छोड़ो या कुचले जाओ। पुलिस के जवानों ने छलांग लगाकर अपनी जान बचाई। अगर जरा सी भी देरी होती, तो मुजफ्फरपुर पुलिस को आज अपने साथियों की शहादत का शोक मनाना पड़ता। माफिया की यह हरकत दर्शाती है कि उनके मन में कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है और वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

पीछा और बरामदगी: कार छोड़कर अंधेरे में ओझल हुए तस्कर

​पुलिस पर हमले की कोशिश के बाद तस्करों ने शहर की गलियों में कार दौड़ानी शुरू कर दी। उत्पाद पुलिस ने भी उनका पीछा किया। खुद को घिरता देख और सुबह की रोशनी बढ़ने के कारण पकड़े जाने के डर से तस्करों ने एक सुनसान मोड़ पर कार खड़ी कर दी और पास की गलियों में पैदल ही भाग निकले।

​जब पुलिस टीम कार तक पहुँची, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। कार की डिक्की और पिछली सीटों पर विदेशी शराब की दर्जनों बोतलें और कार्टन भरे हुए थे। पुलिस ने कार और शराब की खेप को जब्त कर लिया है, लेकिन अंधेरे का लाभ उठाकर अपराधी भागने में सफल रहे।

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