कांच के टुकड़े, टूटे सपने! ट्रेनों पर पत्थरबाजी करने वालों की अब खैर नहीं; उम्रकैद से लेकर 10 साल तक की जेल, पूर्व रेलवे ने जारी किया ‘खतरनाक’ डेटा

HIGHLIGHTS: आपकी एक ‘लापरवाह’ हरकत छीन सकती है किसी की जिंदगी; पूर्व रेलवे ने पत्थरबाजों के खिलाफ शुरू किया ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान

  • बड़ी चेतावनी: चलती ट्रेन पर पत्थर फेंकना ‘मनोरंजन’ नहीं, बल्कि संगीन अपराध है; दोषी पाए जाने पर हो सकती है उम्रकैद।
  • आंकड़ों का खुलासा: साल 2026 में अब तक पूर्व रेलवे के विभिन्न मंडलों में पत्थरबाजी की 21 घटनाएं दर्ज; सुरक्षा बलों ने 14 को दबोचा।
  • कानूनी हंटर: रेलवे अधिनियम की धारा 152 और 154 के तहत कठोर कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान।
  • CCTV की नजर: पटरियों के पास की हर गतिविधि अब कैमरे में कैद; अपराधियों की पहचान के लिए रिकॉर्डिंग का हो रहा इस्तेमाल।
  • VOB इनसाइट: राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुँचाना अपने ही घर को जलाने जैसा है; बच्चों को इस ‘जानलेवा खेल’ से दूर रखने की अपील।

कोलकाता / मालदा | 24 मार्च, 2026

​कल्पना कीजिए, एक छोटा बच्चा ट्रेन की खिड़की के पास बैठकर बाहर के हरे-भरे खेतों को निहार रहा है और अचानक एक पत्थर कांच को तोड़ता हुआ उसकी आंखों या सिर में जा लगता है। यह कोई डरावनी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि उन मासूमों की हकीकत है जो ट्रेनों पर होने वाली पत्थरबाजी का शिकार बनते हैं। पूर्व रेलवे ने आज एक भावुक लेकिन सख्त अपील जारी करते हुए इस ‘जानलेवा’ प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए मोर्चा खोल दिया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व रेलवे के मालदा, आसनसोल, हावड़ा और सियालदह मंडलों में पत्थरबाजी की घटनाएं चिंताजनक स्तर पर पहुँच गई हैं।

“ट्रेन सिर्फ लोहा नहीं, जीवन रेखा है”: रेलवे की भावुक अपील

​पूर्व रेलवे ने स्पष्ट किया है कि हमारी ट्रेनें देश की जीवन रेखा हैं, जो सपनों और परिवारों को ढोती हैं। जब कोई व्यक्ति ट्रेन पर पत्थर फेंकता है, तो वह केवल एक खिड़की नहीं तोड़ता, बल्कि अपने ही किसी भाई, पड़ोसी या मित्र को घायल कर सकता है। अक्सर देखा गया है कि रेल पटरियों के पास खेलने वाले बच्चे मनोरंजन के नाम पर यह कृत्य करते हैं। इसलिए, रेलवे ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को इस विनाशकारी कार्य के परिणामों के बारे में शिक्षित करें।

VOB डेटा चार्ट: 2026 में पत्थरबाजी की घटनाओं का ‘कच्चा चिट्ठा’

मंडल (Division)

दर्ज घटनाएं

दर्ज मामले

सुलझाए गए मामले

गिरफ्तारियां

हावड़ा मंडल

06

06

04

05

सियालदह मंडल

04

04

03

04

आसनसोल मंडल

06

06

01

02

मालदा मंडल

05

05

03

03

कुल योग

21

21

11

14

विशेष नोट: पश्चिम बंगाल क्षेत्र में कुल 12 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 10 गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं।

उम्रकैद की सजा: कानून के शिकंजे में ‘पत्थरबाज’

​रेलवे अधिनियम, 1989 के तहत पत्थर फेंकना एक अत्यंत गंभीर अपराध है। पूर्व रेलवे ने चेतावनी दी है कि दोषी पाए जाने पर निम्नलिखित सजाएं हो सकती हैं:

  1. धारा 152: यदि कोई व्यक्ति किसी यात्री को चोट पहुँचाने या संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के इरादे से पत्थर फेंकता है, तो उसे आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा हो सकती है।
  2. धारा 154: यदि यह कृत्य लापरवाही या जल्दबाजी में किया गया हो, तब भी एक वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।

CPRO का बयान: “CCTV की नजर से बचना नामुमकिन”

​पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) श्री शिबराम माझि ने कहा कि किसी को भी यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि वे अंधेरे या भीड़ का फायदा उठाकर बच निकलेंगे। पटरियों के पास के इलाकों में सीसीटीवी निगरानी बढ़ा दी गई है। हर गतिविधि रिकॉर्ड की जा रही है और इन रिकॉर्डिंग का उपयोग अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुँचाने के लिए सबूत के तौर पर किया जा रहा है।

VOB का नजरिया: क्या केवल कानून से रुकेगी पत्थरबाजी?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि रेलवे की यह पहल सुरक्षा की दृष्टि से मील का पत्थर है, लेकिन सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है।

  1. सामुदायिक सुरक्षा: यदि आप किसी को पटरी के पास पत्थर उठाते देखें, तो उसे तुरंत रोकें। आपका एक हस्तक्षेप किसी यात्री की आंखें बचा सकता है या किसी युवा का भविष्य बर्बाद होने से रोक सकता है।
  2. मालदा और सीमांचल पर असर: बिहार के मालदा मंडल से सटे इलाकों में ऐसी घटनाएं अक्सर ट्रेनों की गति को भी प्रभावित करती हैं। राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
  3. जागरूकता अभियान: रेलवे को चाहिए कि वे स्कूलों और ग्रामीण चौपालों में जाकर इस ‘खूनी खेल’ के कानूनी और मानवीय परिणामों के बारे में लोगों को और अधिक जागरूक करें।

निष्कर्ष: सुरक्षित सफर, आपकी जिम्मेदारी

​पत्थर फेंकना कोई मज़ाक नहीं, बल्कि एक आपराधिक कृत्य है। आइए, भारत की इन आधुनिक ट्रेनों को सुरक्षित और पत्थर-मुक्त रखने का संकल्प लें।

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