भागलपुर | 27 फरवरी, 2026: फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर आगामी 3 मार्च, मंगलवार को चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण इस घटना का असर न केवल मंदिरों की पूजा-विधि पर पड़ेगा, बल्कि विभिन्न राशियों के जातकों के जीवन पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। भागलपुर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज कुमार मिश्र के अनुसार, ग्रहण के कारण सूतक काल सुबह से ही प्रभावी हो जाएगा।
सूतक काल और ग्रहण का समय
पंडित मनोज कुमार मिश्र ने बताया कि चंद्रग्रहण का मुख्य समय शाम 5:50 बजे से शुरू होकर 6:46 बजे तक रहेगा। हालांकि, शास्त्रसम्मत मान्यताओं के अनुसार, चंद्रग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। इस गणना के आधार पर 3 मार्च को सुबह 8:50 बजे ही सूतक काल लग जाएगा, जो ग्रहण की समाप्ति के बाद ही खत्म होगा।
मंदिरों के पट रहेंगे बंद
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के दौरान देव-दर्शन और स्पर्श वर्जित होता है। इसी कारण भागलपुर के तमाम छोटे-बड़े मंदिरों के पट 3 मार्च को सुबह 8:50 बजे ही बंद कर दिए जाएंगे। ग्रहण समाप्त होने और शुद्धिकरण के बाद, रात 7:00 बजे मंदिरों के कपाट पुनः दर्शनार्थियों के लिए खोले जाएंगे। इस दौरान मंदिरों में भजन-कीर्तन और मानसिक जाप तो हो सकेंगे, लेकिन प्रतिमाओं का स्पर्श और भोग लगाना वर्जित रहेगा।
राशियों पर कैसा रहेगा प्रभाव?
ज्योतिषाचार्य ने विभिन्न राशियों के लिए ग्रहण के संभावित फलों की भी गणना की है:
- मिथुन और तुला राशि: इन जातकों के लिए यह ग्रहण शुभ रहने वाला है। मिथुन राशि वालों को धन लाभ के योग हैं, वहीं तुला राशि वालों को लाभ का अनुभव प्राप्त होगा।
- मेष और वृष राशि: मेष राशि वालों के लिए यह समय मानसिक चिंता बढ़ाने वाला हो सकता है, जबकि वृष राशि के जातकों को व्यथा (कष्ट) का सामना करना पड़ सकता है।
- कर्क और कन्या राशि: इन दोनों ही राशियों के जातकों को सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि उन्हें आर्थिक या अन्य प्रकार की क्षति और हानि की संभावना है।
- सिंह राशि: सिंह राशि वालों के लिए ‘घात’ के संकेत हैं, अतः उन्हें स्वास्थ्य और दुर्घटनाओं के प्रति विशेष सतर्क रहना चाहिए।
VOB का नजरिया: आस्था और विज्ञान का संगम
होली के ठीक बाद पड़ने वाला यह चंद्रग्रहण भागलपुर के श्रद्धालुओं के लिए काफी महत्वपूर्ण है। जहां विज्ञान इसे पृथ्वी की छाया के चंद्रमा पर पड़ने के रूप में देखता है, वहीं ज्योतिष इसे राशियों के बदलाव और जीवन पर प्रभाव से जोड़ता है। पंडितों का सुझाव है कि सूतक काल के दौरान दान-पुण्य और मंत्रोच्चार से प्रतिकूल प्रभावों को कम किया जा सकता है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


